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राष्ट्रीय गरिमा के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पर संसद की मुहर
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राष्ट्रीय गरिमा के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पर संसद की मुहर

Awaz E Bihar•30 जुलाई 2026 को 04:51 pm बजे•23 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

राष्ट्रगान "वंदे मातरम" के अपमान पर दंड के प्रावधान से संबंधित राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2026 गुरुवार को लोकसभा से पारित होने के बाद संसद से भी मंजूरी प्राप्त कर ली। इस विधेयक को राज्यसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी थी।
तीन बार कार्यवाही स्थगित होने के बाद जब दोपहर 3:30 बजे लोकसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान कार्यवाही अध्यक्ष संध्या राय ने हंगामे के बीच ही विधेयक को सदन में चर्चा और मंजूरी के लिए पेश किया।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की सदस्य कनिमोझी ने विधेयक का जोरदार विरोध करते हुए इसे लोकतंत्र विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संघीय प्रणाली के खिलाफ है। उनका कहना था कि जब सदन में अनुशासन ही नहीं है तो वे अपनी बात कैसे रख सकती हैं। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।
कनिमोझी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से देश में ध्रुवीकरण पैदा करना चाहती है और तमिल जनता का अपमान कर रही है। उनके अनुसार यह विधेयक देश को विभाजित करने वाला है, यह राष्ट्रवाद नहीं बल्कि लोकतंत्र के खिलाफ कदम है, और सरकार को राज्यों की राय भी सुननी चाहिए।
भाजपा के सदस्य संबित पात्रा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसके माध्यम से "वंदे मातरम" को कानूनी संरक्षण दिया जा रहा है ताकि लोग बिना किसी भय या रुकावट के राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान कर सकें।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान भी सदन में हंगामा हो रहा है। उन्होंने कहा कि 1950 में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आश्वस्त किया था कि "जन गण मन" और "वंदे मातरम" दोनों को समान सम्मान मिलेगा, लेकिन उनके अनुसार पिछले 76 वर्षों में कांग्रेस सरकारों ने इस वादे पर अमल नहीं किया।
विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह केवल एक कानूनी संशोधन नहीं बल्कि भारत की आत्मा, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम के सम्मान के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रदर्शन है।
उन्होंने कहा कि 1971 के राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के तहत जिस तरह राष्ट्रगान "जन गण मन" को कानूनी संरक्षण प्राप्त है, उसी तरह का सम्मान 1950 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने "वंदे मातरम" के लिए भी सुनिश्चित करने की बात कही थी।
नित्यानंद राय ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने जब "वंदे मातरम" की रचना की थी तो उन्होंने कहा था कि शायद वे इसके प्रभाव अपने जीवनकाल में नहीं देख पाएंगे, लेकिन एक समय आएगा जब पूरा देश इसे अपने होंठों पर सजाएगा। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सपने को साकार कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि "वंदे मातरम" एक भारत, श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि 21वीं सदी भारत की होगी और भारत केवल आर्थिक शक्ति ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों के आधार पर विश्व का नेतृत्व करेगा।
मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम भी नरेंद्र था, इसलिए "एक नरेंद्र ने भविष्यवाणी की थी और दूसरे नरेंद्र इसे पूरा कर रहे हैं।"
यह विधेयक 1971 के राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम में संशोधन करता है। इस कानून में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान पर दंड का प्रावधान है। संशोधन के बाद राष्ट्रगीत "वंदे मातरम" का अपमान या इसके गायन में जानबूझकर रुकावट डालना भी दंडनीय अपराध होगा, जिस पर तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
विधेयक हंगामे के बीच पारित कर लिया गया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
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