एसआईआर का फैसला सर्वसम्मत, कैबिनेट सचिव को लिखा पत्र किसी नीति से संबंधित नहीं: चुनाव आयोग
Awaz E Bihar••27 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
अपने फैसलों और आंतरिक कामकाज पर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने फिर से स्पष्ट किया है कि राज्यों की मतदाता सूचियों की विशेष व्यापक पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सही करना है और कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग से संबंधित किसी भी नीति से संबंधित नहीं था। शनिवार को यहां आयोजित आयोग की पूर्ण बैठक के बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि "कैबिनेट सचिव को संबोधित पत्र आयोग या उसके सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से संबंधित किसी भी नीतिगत मुद्दे से संबंधित नहीं था, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।" आयोग ने कहा, ''संबंधित अधिकारी द्वारा जारी पुनर्वितरण आदेश वास्तव में दो चुनाव आयुक्तों के निर्देशों के बाद लागू नहीं किए गए थे।'' साथ ही आयोग ने स्पष्ट किया कि उप चुनाव आयुक्त से कभी भी सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की निगरानी वापस नहीं ली गयी. आज की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त एसएस सिंधु और विवेक जोशी भी शामिल हुए. गौरतलब है कि एक अंग्रेजी दैनिक ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद हैं. इस पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी की है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उसके सभी फैसले आम सहमति से लिये गये हैं. एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गए अन्य सवालों पर आयोग ने कहा, "सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर आयोजित करने के लिए 24 जून, 2025 को जारी आदेश को आयोग द्वारा सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई थी। एसआईआर बिहार से शुरू हुआ और बाद में पश्चिम बंगाल और 30 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दिया गया।" 27 मई, 2026 के अपने आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने कानून के अनुसार एसआईआर आयोजित करने के आयोग के फैसले को बरकरार रखा। आयोग ने कहा कि 27 अक्टूबर, 2025 को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर कार्यक्रम और 14 मई, 2026 को अन्य 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर कार्यक्रम को भी आयोग की सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई। आयोग ने कहा, ''मतदाताओं की अंतिम संख्या तब पता चलेगी, जब तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में सूचियों का अंतिम प्रकाशन हो जाएगा.'' गोवा के एसआईआर में कुछ मतदाताओं के नाम गायब होने के संबंध में की गई कार्रवाई के बारे में आयोग ने कहा कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं के फॉर्म एकत्र करने का निर्देश दिया था। ऐसे 97 मतदाताओं में से 81 ने सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 भी भर दिया है. आयोग ने कहा, "इसके नवीनतम कदम महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि आयोग चरण-दर-चरण तरीके से एसआईआर प्रक्रिया जारी रखता है। इस प्रक्रिया में मतदाता सूचियों का सत्यापन और अद्यतनीकरण शामिल है और दस्तावेजों, मतदाता नामांकन और चुनाव अधिकारियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं पर राजनीतिक बहस हुई है।" आयोग ने कहा है कि उसने बार-बार कहा है कि एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य एक वैध मतदाता सूची सुनिश्चित करना है। आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया है कि जिन पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से अपना नाम शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। पूर्ण आयोग की मंजूरी के साथ शनिवार को जारी ईसीआई की नवीनतम प्रेस विज्ञप्ति में घर-घर सहायता, ऑनलाइन सुनवाई, कमजोर मतदाताओं के लिए विशेष शिविर और दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए अतिरिक्त समय पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही आयोग ने अपनी डिजिटल प्रणाली की समीक्षा और आंतरिक प्रबंधन प्रक्रियाओं को मजबूत करने की भी घोषणा की है। आयोग ने कहा है कि मतदाता पंजीकरण और चुनाव विवरण के संपादन की सुविधाएं उसके आधिकारिक मतदाता सेवा मंच पर भी उपलब्ध हैं। पात्र नागरिक इन सेवाओं के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने आज की बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के अनुरोध पर विचार करने के बाद इन दोनों राज्यों में एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने का समय बढ़ाने का भी फैसला किया है।