ईरान के राष्ट्रपति मसूद پزشکیान का कहना है कि युद्ध किसी के हित में नहीं है। एक बयान में उन्होंने कहा है कि तनाव कम करने के लिए हर तर्कसंगत और कूटनीतिक मार्ग अपनाया जाना चाहिए। मसूद پزشکیान का कहना है कि दुश्मन पर अविश्वास और आपसी संबंधों में सावधानी बरतना एक अनिवार्य आवश्यकता है। दूसरी ओर, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी का कहना है कि हम वर्तमान वार्ता को युद्ध की निरंतरता मानते हैं, ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता जारी रखने का फैसला किया है। कतरी टीवी से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा है कि वार्ता का यह अर्थ नहीं है कि किसी भी कीमत पर बातचीत की जाए, वार्ता का यह अर्थ नहीं है कि दूसरे पक्ष के हर तरीके को स्वीकार कर लिया जाए। इब्राहिम अज़ीज़ी का कहना है कि ईरान ने स्पष्ट रेड लाइंस निर्धारित की हैं जिनका सम्मान करना आवश्यक है, ईरान की वार्ता रणनीति पूर्ण राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा आवश्यकताओं के तहत होती है। ईरानी स्पीकर मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ़ ने कहा है कि तेहरान अमेरिका के साथ वार्ता जारी रखे हुए है मगर संभावित नई तनाव के मद्देनज़र "आवश्यक कदम" उठाने के लिए तैयार भी है। ईरानी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, क़ालिबाफ़ ने टेलीविजन पर एक साक्षात्कार में बताया है कि "हम दुश्मन पर भरोसा नहीं करते। किसी भी पल वह युद्धविराम को तोड़ सकता है।" उन्होंने कहा कि "हम वार्ता कर रहे हैं, मगर हम आवश्यक कदमों के लिए भी तैयार हैं।" उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले साल जून में हुए 12 दिनों के युद्ध से सबक सीखा है और भविष्य में किसी भी मुकाबले के लिए तैयार है। क़ालिबाफ़ ने यह भी कहा कि अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी संघर्ष वार्ता प्रक्रिया के दौरान "अमेरिकी धोखाधड़ी" के साथ शुरू हुआ। यह बयान तब आया जब अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने एक पोस्ट में पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी ध्वजवाहक एक कार्गो जहाज को "रोकते हुए निष्क्रिय कर दिया"।