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राष्ट्रीय

प्रसिद्ध पत्रकार और उपन्यासकार महमूद आयूबी की 16वीं बरसी पर आईडिया की ओर से आयोजित प्रभावशाली समारोह में श्रद्धांजलि अर्पित की गई

Awaze Bihar2 मिनट पढ़ें

महमूद आयूबी को सच्चाई और खुलूस की मिसाल बताया गया, उनके परिवार, मित्रों और साहित्यिक हस्तियों ने शिरकत की।
प्रसिद्ध पत्रकार, साहित्यकार और कथाकार महमूद आयूबी की 16वीं बरसी के अवसर पर संगठन आइडिया द्वारा उत्तरी मुंबई में मिल्टनगर, अंधेरी के पास स्थित शांतिलाल स्टूडियो में एक अत्यंत भावपूर्ण, भावनात्मक और सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में दिवंगत के परिवार के सदस्यों, निकट मित्रों, पत्रकारिता और साहित्यिक मित्रों तथा कला से जुड़े व्यक्तियों ने भाग लिया और महमूद आयूबी के जीवन, चरित्र और सेवाओं को श्रद्धांजलि दी।
समारोह का आरंभ आइडिया के अध्यक्ष मुजीब खान के प्रारंभिक शब्दों से हुआ, जिन्होंने महमूद आयूबी के साथ अपने दीर्घकालिक संबंधों और कलात्मक मित्रता का उल्लेख करते हुए बताया कि जब उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानियों पर आधारित नाटकीय श्रृंखला "आदाब, मैं प्रेमचंद हूँ" शुरू करने का इरादा व्यक्त किया, तो इसमें प्रेमचंद की भूमिका निभाने के लिए महमूद आयूबी ही उनकी पहली पसंद थे। मुजीब खान के अनुसार आयूबी ने अपनी विशिष्ट सादगी में कहा था, "आप बड़ा जोखिम ले रहे हैं", लेकिन समय ने साबित किया कि यह जोखिम नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक निर्णय था। यह शो असाधारण रूप से सफल हुआ और आज भारत में स्टेज नाटकों की सबसे लंबी परंपराओं में से एक है, जिसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त है।
समारोह में महमूद आयूबी के सहयोगी रियाज शेख ने उनकी उत्कृष्ट हास्य भावना, व्यंग्यात्मक वाक्यों और महफिल को जीवंत रखने की क्षमता पर प्रकाश डाला, जबकि सराज अंसारी ने उनके साथ बिताए गए यादगार पलों का वर्णन किया।
वरिष्ठ पत्रकार सईद हमीद ने आयूबी साहब की स्पष्टवादिता, बिना लाग-लपेट की बात और निगार लाइब्रेरी की साहित्यिक महफिलों का उल्लेख करते हुए कहा कि महमूद आयूबी एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके दिल में सच्चाई और पारदर्शिता आइने की तरह झलकती थी। उन्होंने कहा, "आयूबी साहब फिर से नहीं आ सकते, लेकिन उनकी सच्चाई और ईमानदारी को हम आज भी अपने जीवन में अपना सकते हैं।" आयूबी को सच्चाई और खुलूस की मिसाल बताया गया।
महफिल का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया जब दिवंगत की पुत्री फौजिया आयूबी ने अपने विचार व्यक्त किए। रुंधी हुई आवाज और नम आंखों के साथ उन्होंने अपने पिता की मानवता, मेहमाननवाजी और जीवन के दर्शन का उल्लेख किया। उन्होंने एक घटना सुनाते हुए कहा कि एक बार उन्होंने पिता से शिकायत की कि मिलने वालों की संख्या कम की जाए, जिस पर महमूद आयूबी ने जवाब दिया था, "हमारी जिंदगी में तो लोग आएंगे, लेकिन हमारी मौत के बाद कोई नहीं आएगा।" यह वाक्य सुनकर महफिल पर गहरी खामोशी छा गई।
अंत में दिवंगत की पोती सीमा ने नाना के साथ बिताए गए यादगार पलों का उल्लेख किया, जबकि आइडिया के अध्यक्ष मुजीब खान ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए समारोह के समापन की घोषणा की। यह समारोह न केवल महमूद आयूबी की याद में था, बल्कि सच्चाई, खुलूस और मानवता के मूल्यों के पुनरुद्धार का एक सुंदर अभिव्यक्ति भी साबित हुई।

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