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राजनीति

अरावली की पहाड़ियाँ पूरी तरह से सुरक्षित हैं: भूपेंद्र यादव

Awaze Bihar2 मिनट पढ़ें

वन और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली की पहाड़ियों के सिलसिले में फैलाए जा रहे संदेहों को दूर करते हुए कहा है कि अरावली की पहाड़ियां पूरी तरह से सुरक्षित हैं। अलवर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को जनता के नाम लिखे गए पत्र "अलवर के नाम एक पत्र" भेजते हुए कहा कि अरावली के सिलसिले में फैलाई जा रही गलतफहमियों को दूर करने के लिए वे यह संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अलवर भी अरावली शृंखला का एक अभिन्न अंग है, जहां सरिस्का टाइगर रिजर्व और सिलीसेड़ झील जैसी प्राकृतिक विरासतें मौजूद हैं।

उन्होंने क्षेत्र के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अरावली पूरी तरह से सुरक्षित है और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला अरावली के समग्र संरक्षण, अवैध खनन पर रोक लगाने, पर्यावरण मानकों के तहत संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वैध खनन के माध्यम से स्थानीय लोगों को लाभ पहुंचाने और क्षेत्र के आर्थिक विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संरक्षण को ध्यान में रखते हुए किया गया है। वास्तव में अदालत द्वारा अरावली के निर्धारण के लिए अपनाया गया मापदंड, जिसके अनुसार स्थानीय स्तर से 100 मीटर से अधिक ऊंची जमीनी संरचना या पहाड़ी को अरावली माना जाएगा, और राजस्थान में पहले से लागू मानक, जो उस समय के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शासनकाल में 2002 में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया था, दोनों एक दूसरे के साथ संगत हैं।

इसी आधार पर आज भी राजस्थान में अरावली की वे पहाड़ियां, जिनकी ऊंचाई 100 मीटर से अधिक है, वहां खनन पर प्रतिबंध बरकरार है। श्री यादव ने कहा कि अधिकांश लोगों ने अदालत के फैसले का गहराई से अध्ययन नहीं किया है, जिसका फायदा उठाकर कुछ लोग अरावली की व्याख्या और इसके भविष्य के बारे में तथ्यों के विपरीत आधारहीन गलतफहमियां फैला रहे हैं।

श्री यादव ने कहा कि यह जानना भी आवश्यक है कि जो पहाड़ियां 100 मीटर से अधिक ऊंची हैं, वे केवल चोटी से जमीन तक ही अरावली पहाड़ नहीं मानी जाएंगी, बल्कि उनके तल में आने वाली सभी जमीनी संरचनाएं भी अरावली पहाड़ियों में शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि अरावली के लिए अपनाए गए नए मानक से 90 प्रतिशत पहाड़ी शृंखला बर्बाद हो जाएगी, यह पूरी तरह से आधारहीन है। वास्तव में इस मानक के तहत 90 प्रतिशत से अधिक अरावली क्षेत्र सुरक्षित रहेगा।

उन्होंने कहा कि अरावली के लिए अपनाए गए नए मानक के परिणामस्वरूप 90 प्रतिशत पहाड़ी शृंखला बर्बाद हो जाएगी, यह सरासर आधारहीन है। वास्तव में इस मानक के तहत 90 प्रतिशत से अधिक अरावली क्षेत्र सुरक्षित रहेगा। जहां तक खनन का सवाल है, अदालती फैसले के अनुसार किसी भी अवैध खनन को वैध रूप नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा, मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि मैं अरावली की गोद में पैदा हुआ हूं, इसी पहाड़ी शृंखला के निकट मेरी परवरिश हुई है। अरावली के संरक्षण और विकास के लिए मैं हमेशा प्रयासरत रहा हूं और हमेशा प्रयासरत रहूंगा।

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