94 लाख 71 हजार लोगों की एनीमिया की जांच की गई, 18 लाख से ज्यादा लोगों में एनीमिया पाया गया
Awaz E Bihar••23 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
पटना, 29 सितंबर: राज्य में एनीमिया की दर को कम करने के उद्देश्य से बिहार सरकार स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित विशेष अभियान 'एनीमिया मुक्त बिहार' के तहत बड़े पैमाने पर परीक्षण, उपचार और पोषण संबंधी परामर्श दिया जा रहा है। 25 अगस्त से 28 सितंबर 2026 तक राज्य भर में 94 लाख 71 हजार 377 लोगों की एनीमिया जांच की गयी है. गौरतलब है कि इस विशेष अभियान की शुरुआत 25 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की थी. अभियान के तहत अब तक किए गए परीक्षणों में 5,632 लोगों को गंभीर एनीमिया, 3,34,171 लोगों को मध्यम एनीमिया और 1,422,767 लोगों को हल्के एनीमिया का निदान किया गया है. स्वास्थ्य विभाग एनीमिया से पीड़ित लोगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उपचार, पोषण संबंधी परामर्श, बेहतर चिकित्सा केंद्रों पर रेफर करने और निरंतर निगरानी प्रदान कर रहा है। यह विशेष अभियान 25 अगस्त से 30 नवम्बर 2026 तक जारी रहेगा। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि "एनीमिया मुक्त वसंत" अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को एनीमिया जांच, उपचार और पोषण संबंधी परामर्श प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है. एनीमिया का शीघ्र पता लगने से प्रभावित लोगों को आवश्यकतानुसार तत्काल उपचार प्रदान करना आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि एनीमिया का सीधा असर बच्चों, किशोर-किशोरियों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसीलिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गंभीर और मध्यम एनीमिया से पीड़ित लोगों की जांच, चिकित्सा केंद्रों पर रेफर करने और निरंतर चिकित्सा निगरानी के साथ उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एनीमिया से बचाव के लिए उचित एवं संतुलित आहार का प्राथमिक महत्व है, इसलिए अभियान के दौरान लोगों को आयरन युक्त स्थानीय खाद्य पदार्थ, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवन शैली के बारे में भी जानकारी दी जा रही है. उन्होंने अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ-साथ आम जनता की भी भागीदारी का आह्वान किया। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में कुल 12 लाख 82 हजार 500 लोगों की एनीमिया जांच और आवश्यकतानुसार इलाज का लक्ष्य रखा है. 28 सितंबर तक 94 लाख 71 हजार 377 लोगों का टेस्ट किया जा चुका है. अभियान के तहत जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर एनीमिया जांच की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण दिवस, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की बैठकों और सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सक्रिय चिकित्सा टीमों द्वारा एनीमिया की जाँच की जा रही है। परीक्षण के लिए डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स, क्युवेट, लैंसेट, अल्कोहल स्वैब और डिस्पोजेबल दस्ताने सहित आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। उपचार के लिए आवश्यकतानुसार आयरन फोलिक एसिड सिरप एवं निर्धारित खुराक आयरन फोलिक एसिड की गोलियाँ निःशुल्क उपलब्ध करायी जा रही हैं। गर्भवती महिलाओं को आवश्यकतानुसार एफसीएम (फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज) थेरेपी भी उपलब्ध करायी जा रही है। अभियान के दौरान मध्यम एवं गंभीर एनीमिया से पीड़ित पाए जाने वालों को उचित उपचार, आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा केन्द्रों पर रेफर करने, सतत परामर्श एवं फॉलो-अप की व्यवस्था की जा रही है। ऐसे योग्य व्यक्तियों को आवश्यकतानुसार आईवी सुक्रोज एवं एफसीएम इंजेक्शन भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं। स्क्रीनिंग के बाद योग्य व्यक्तियों का विवरण 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान एप्लीकेशन' पर डिजिटल रूप से दर्ज किया जा रहा है, जिससे प्रभावित व्यक्तियों की पहचान, उपचार और अनुवर्ती निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।
पोषण परामर्श भी अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है
एनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए न केवल दवाइयों बल्कि पोषण संबंधी जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्क्रीनर्स को स्थानीय रूप से उपलब्ध आयरन युक्त खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार, उचित आहार आदतों, मोटापा प्रबंधन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर सलाह दी जाती है।
इस कार्य में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, एएनएम, आरएमएनसीएचए परामर्शदाता एवं अन्य चिकित्सा कर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
बांका, सीतामढी और पश्चिमी चंपारण समेत कई जिलों में प्रगति
बांका, सीतामढी, पश्चिम चंपारण, सारण और मधेपुरा उन जिलों में शामिल हैं जहां 28 सितंबर 2026 तक के प्रदर्शन के अनुसार अभियान के तहत महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य की तुलना में कई अन्य जिलों में संतोषजनक प्रगति हुई है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलों में अभियान की सतत् निगरानी एवं मूल्यांकन किया जा रहा है। परीक्षण, उपचार और फॉलोअप की गति को और बेहतर बनाने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को समय-समय पर आवश्यक निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं, ताकि अभियान के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करते हुए अधिक से अधिक लोगों को एनीमिया का समय पर निदान और उचित उपचार प्रदान किया जा सके।