किसी देश का भविष्य उसके पुस्तकालयों में एकत्र होने वाले युवाओं की भीड़ से तय होता है: शाह
Awaz E Bihar••4 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि किसी देश का भविष्य कृषि, बाजार या उद्योग से नहीं बल्कि उसके पुस्तकालयों में जमा होने वाले युवाओं की भीड़ से तय होता है। श्री शाह ने आज यहां नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) द्वारा आदि मार्ग में नवनिर्मित हाई-टेक, डिजिटल और अत्याधुनिक लोक नायक जे पी नारायण (जेपीएन) पब्लिक लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि किसी देश का भविष्य कृषि, बाजार या उद्योग से नहीं बल्कि उसके पुस्तकालयों में जमा होने वाले युवाओं की भीड़ से तय होता है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने वाली, देश के निर्माण और देश को महानता देने वाली सभी गतिविधियों का आधार ज्ञान में होता है। यह ज्ञान केवल एक पुस्तकालय ही दे सकता है। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे एक बार पुस्तकालय से जरूर जुड़ें। पढ़ने की आदत बनते ही अच्छे और बुरे की पहचान स्वयं हो जाएगी।
गृह मंत्री ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिस छोटे से शहर में वे पैदा हुए और उनका बचपन गुजरा, वहां एक समृद्ध पुस्तकालय था। इस पुस्तकालय से जुड़ने के कारण उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया। 'अलादीन और जादुई चिराग', 'अली बाबा चालीस चोर', 'सिंदबाद की यात्रा' जैसी पुस्तकें पढ़ते पढ़ते कब उनकी पढ़ाई का सफर वेदों और उपनिषदों तक पहुंच गया, उन्हें पता ही नहीं चला। उन्होंने कहा कि आज हॉल में उन्होंने एक वाक्य लिखा हुआ देखा कि "बोलने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि शब्द कभी वापस नहीं आते।" उन्होंने कहा कि कोई भी वाक्य बोलने से पहले सोचना चाहिए और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए कि क्या सोचना है, और यह संस्कार केवल पुस्तकालय से ही मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकालय का उनके जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। उनके संसदीय क्षेत्र के लगभग हर गांव में एक पुस्तकालय खोली गई है, जिसमें लगभग 3-4 हजार पुस्तकें हैं। इन पुस्तकालयों को केंद्रीय पुस्तकालय से जोड़ा गया है, जिसमें एक लाख पुस्तकें हैं। इसके अलावा चार मोबाइल वैन भी चलाई गई हैं। उन्होंने कहा कि गांव के बच्चे पुस्तकालय में अपनी पसंद की पुस्तक का नाम लिखकर उसे मंगवाने का अनुरोध करते हैं, और हर शुक्रवार को बच्चों को उनकी पसंद की पुस्तक गांव में ही उपलब्ध करा दी जाती है। उन्होंने कहा कि हमने हर पुस्तकालय को स्कूलों से जोड़ने की कोशिश की है।
गृह मंत्री ने कहा कि लोक नायक जे पी नारायण के नाम से स्थापित यह पुस्तकालय युवाओं के ज्ञान और विचार का नया केंद्र बनेगी। उन्होंने दिल्ली सरकार से अपील की कि वे दिल्ली की सभी पुस्तकालयों को आपस में जोड़ें और स्कूलों को उनसे जोड़ने के लिए एक ठोस योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि एक एक्शन प्लान बनाकर पुस्तक प्रेमियों को पुस्तकालयों से जोड़ने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान के सागर में गोता लगाने का साहस देता है और सागर के नीचे पड़े मोती और जवाहरात को चुनकर ऊपर लाने की प्रेरणा भी देता है। ज्ञान के सागर के गोते से निकले यह मोती और जवाहरात ही व्यक्तित्व को निखारते हैं, देश को आगे बढ़ाते हैं, देश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाते हैं, देश को सभ्य, शिक्षित और सुरक्षित बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आदि रामधारी सिंह 'दंकर' जी को पढ़े बिना इस देश की आत्मा, संस्कृति, स्वाभिमान और संघर्ष को नहीं जाना जा सकता, और पुस्तकालय इस में सबसे मजबूत साधन बन सकता है।