बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव आज, सख्त सुरक्षा का इंतजाम
Awaz E Bihar••32 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
पटना : (एबीएन) देश की 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं, जिनमें बिहार की हाई प्रोफाइल बांकीपुर सीट भी शामिल है। इसके अलावा गुजरात की मांजलपुर सीट और मध्य प्रदेश की सबसे ज्यादा चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर भी कल उपचुनाव होना है। इनमें बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जहां गुरुवार को वोटिंग होगी। बांकीपुर विधानसभा सीट: इस सीट पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक 422 पोलिंग केंद्रों पर 3.79 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यहां सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की 14 कंपनियां तैनात की गई हैं। इसके अलावा बिहार पुलिस और होम गार्ड के जवानों की भी बड़ी संख्या तैनात की गई है। इस सीट पर कुल 25 उम्मीदवार मैदान में हैं और असली मुकाबला भाजपा के नीरज सिन्हा, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की रेखा गुप्ता और जनसूरज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर के बीच है। पिछले 3 दशकों से बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के कब्जे में रही है। 1995 में इस सीट पर नवीन किशोर सिन्हा ने पहली बार जीत हासिल की थी। इसके बाद भाजपा को यहां कभी हार नहीं मिली। नवीन किशोर सिन्हा लगातार 4 बार यहां से विधायक चुने गए थे। दिसंबर 2005 में उनके निधन के बाद अप्रैल 2006 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे नितिन नवीन इस सीट से जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद से नितिन नवीन लगातार यहां से जीतते रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की थी और पहली बार नीतीश कैबिनेट में मंत्री बने थे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन राज्यसभा के सदस्य भी चुने गए। उनके इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर होने वाला उपचुनाव बहुत दिलचस्प दिखाई दे रहा है। भाजपा ने शुरुआत में इस बांकीपुर सीट से अभिषेक कुमार बंटी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन उनके परिवार के बैकग्राउंड पर सवाल उठने के बाद पार्टी ने उम्मीदवार बदलकर नीरज सिन्हा को मैदान में उतारा। 2025 के चुनाव में भाजपा के नितिन नवीन को बांकीपुर में 98,299 वोट मिले थे, जबकि राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 46,363 वोट मिले थे। इस सीट का इतिहास बहुत महत्वपूर्ण रहा है। यहां से जीतने वाले 2 विधायक बाद में बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। उस समय इस क्षेत्र का नाम पटना पश्चिम (पटना वेस्ट) था। 1962 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कृष्ण बलभ साहाय यहां से जीते थे, जो बाद में बिहार के चौथे मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 1967 के विधानसभा चुनाव में जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा ने केबी साहाय को हराया था। महज 13 विधायक वाली पार्टी से जुड़े होने के बावजूद महामाया प्रसाद सिन्हा ने कर्पूरी ठाकुर जैसे मजबूत उम्मीदवार को पीछे छोड़ते हुए बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 2008 में परिसीमन के बाद पटना पश्चिम का नाम बदलकर बांकीपुर रख दिया गया।