बाढ़ प्रभावित बिहार को खैरात की नहीं, स्थाई समाधान की जरूरत: लालू प्रसाद
Awaz E Bihar••34 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
पटना, 8 सितंबर (एबीएन) पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने मंगलवार को बिहार में बाढ़ से जूझ रहे लोगों की पीड़ा का जिक्र किया और कहा कि बिहार को केंद्र से खैरात नहीं बल्कि अपने हक और प्रतिष्ठा के मुताबिक पैसा चाहिए. बिहार में एक दशक की सबसे भीषण बाढ़ के बीच राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब राज्य का खजाना खाली है और राजकोषीय दबाव चरम पर है, वह बिहार और बिहार के लोगों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर सदन तक अपने संघर्ष को याद कर रहे हैं. श्री प्रसाद ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार के हक के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से ज्यादा लड़ाई लड़ी है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार में बिहार से बड़ी संख्या में केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद बिहार के हितों की रक्षा नहीं की जा रही है. राजद अध्यक्ष ने कहा कि 2004 में राजद के 24 सांसदों के समर्थन से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनी और वह रेल मंत्री बने. उन्होंने दावा किया कि 2004 से 2009 के बीच उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर बिहार के विकास के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से 144,000 करोड़ रुपये हासिल किये. उन्होंने कहा कि उस समय जो भी वादा किया गया था उसे पूरा किया गया. श्री प्रसाद ने आरोप लगाया कि 2005 के बाद उनकी सरकार के दौरान बिहार के लिए स्वीकृत उसी पैकेज की धनराशि का इस्तेमाल तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को दिखाने के लिए किया था। उन्होंने कहा कि केंद्र में प्रभावशाली पदों पर रहने के बावजूद, बिहार से जुड़े नेता राज्य को पर्याप्त केंद्रीय सहायता दिलाने में विफल रहे, हालांकि उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद हमेशा बिहार के हित में बात की। राजद नेता ने कहा कि आज केंद्र और राज्य दोनों जगह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार है और बिहार से बड़ी संख्या में सांसद भी केंद्र में हैं, फिर भी बिहार के मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठाया जा रहा है. राजद अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने हमेशा नेपाल में बाढ़ और नदी की समस्या का स्थायी समाधान खोजने का प्रयास किया है. उन्होंने संसद में 2011 के एक भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा कि उस समय केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार थी और बिहार में जनता दल यूनाइटेड भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, लेकिन केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकार होने के बावजूद वह बिहार के पक्ष में बोलते रहे। श्री प्रसाद ने कहा कि नदियों के रख-रखाव और बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए नेपाल सरकार से स्पष्ट और ठोस बातचीत की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने भी उठाया था. बिहार को हर साल बाढ़ के दौरान तत्काल राहत देने के बजाय लोगों को इस बार-बार आने वाली आपदा से राहत देने के लिए स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बिहार को नदियों के रखरखाव के लिए आवश्यक धनराशि नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव और बाढ़ के दौरान मुफ्त राशन या अन्य सहायता की घोषणा करने के बजाय बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान खोजा जाना चाहिए. श्री प्रसाद ने कहा कि बिहार से लोग रोजगार की तलाश में देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में प्रवास करते हैं और वहां कड़ी मेहनत से अपनी आजीविका कमाते हैं. यह पैसा बिहार में आता तो है, लेकिन राज्य की आबादी और उसके योगदान के अनुपात में खर्च नहीं होता. उन्होंने कहा कि राज्य में एकत्रित धन और दिये गये ऋण के बीच संतुलन की जरूरत है. राजद अध्यक्ष ने बिहार के कम ऋण-जमा अनुपात का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार में ऋण का प्रवाह व्यक्तियों और संस्थानों द्वारा बैंकों में जमा की गई राशि के अनुपात में अपर्याप्त है। उन्होंने सवाल किया कि बिहार का ऋण-जमा अनुपात देश में सबसे कम क्यों है. श्री प्रसाद ने कहा कि मौजूदा बाढ़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार को राहत और पुनर्वास तक सीमित नीति के बजाय बाढ़, नदियों के रखरखाव, नेपाल से पानी के प्रवाह और राज्य के वित्तीय हितों से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान की जरूरत है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से बिहार के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और एक मजबूत और टिकाऊ बाढ़ नियंत्रण नीति बनाने का आह्वान किया।