उत्तरी बिहार में मुख्यमंत्री ग्रामीण पुल योजना के तहत पुलों के निर्माण से संपर्क मजबूत होगा
Awaz E Bihar••16 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
उत्तरी बिहार के बाढ़ से प्रभावित विस्तृत क्षेत्रों में, जहां कोसी, गंडक, कमला और बागमती जैसी नदियों के उफान से हर साल जनजीवन प्रभावित होता रहा है, अब बुनियादी ढांचे के माध्यम से बड़े बदलाव को सुनिश्चित किया जा रहा है। ग्रामीण निर्माण विभाग के तहत संचालित मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत इन क्षेत्रों में ग्राम सेतुओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे इन गांवों और बस्तियों को आपस में जोड़ा जा रहा है जो बरसात के दिनों में पूरी तरह से अलग-थलग हो जाते थे। वर्षों से बाढ़ के दौरान ब्लॉक मुख्यालय और जिला केंद्रों से कट जाने वाले इन गांवों में आवाजाही का एकमात्र साधन नौकाएं थीं, जो न केवल असुरक्षित थीं बल्कि आपातकालीन स्थितियों में जान के लिए भी खतरा बन जाती थीं। अब मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत निर्मित किए जा रहे पुल इस स्थिति को बदलते हुए हर मौसम में सुरक्षित और बाधारहित आवाजाही को सुनिश्चित करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत उत्तरी बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों में पुलों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। इस योजना के तहत पूर्वी चंपारण जिले में सबसे अधिक 76 पुलों का निर्माण स्वीकृत किया गया है, ताकि जिले के दूर-दराज और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। इसी तरह, बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित दरभंगा जिले में आवाजाही को आसान और बाधारहित बनाने के लिए 53 पुल बनाए जा रहे हैं। भौगोलिक रूप से अत्यधिक संवेदनशील सीतामढ़ी जिले में 43 पुलों और मधुबनी जिले में 42 पुलों का निर्माण तेजी से जारी है। इसके अलावा समस्तीपुर जिले में भी ग्रामीण यातायात को बारह महीने उपयोगी बनाने के उद्देश्य से 30 नए पुल बनाए जा रहे हैं। संपर्क के इस विकास का सकारात्मक प्रभाव उत्तरी बिहार की शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी उल्लेखनीय रूप से पड़ेगा। बाढ़ के कारण स्कूलों से वंचित रहे बच्चे अब पूरे वर्ष सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंच सकेंगे, जिससे शिक्षा का निरंतरता सुनिश्चित होगी। इसी तरह किसानों, दूध उत्पादकों और मखाना व लीची जैसे विशेष कृषि उत्पादों से जुड़े किसानों को अपनी उपज समय पर बाजार तक पहुंचाने में बड़ी सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी आय में स्थिरता आएगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।