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कोई भी समाज तभी तरक्की करता है जब महिलाओं को नेतृत्व करने का अवसर देता है
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कोई भी समाज तभी तरक्की करता है जब महिलाओं को नेतृत्व करने का अवसर देता है

Awaz E Bihar•12 अप्रैल 2026 को 04:55 pm बजे•14 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

महिला आरक्षण विधेयक के समय के संबंध में नाराज विपक्ष के साथ सहमति बनाने के सरकार के प्रयासों के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की है।

श्री मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित इस विधेयक को पारित करने के लिए गुरुवार से फिर से शुरू हो रहे संसद के सत्र से पहले सप्ताहांत में लिखे पत्र में इस विधेयक पर हुई चर्चा को ऐतिहासिक बताते हुए इसे लोकतंत्र को और मजबूत बनाने का अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में सभी के सामूहिक संकल्प की भावना के साथ यह पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने कहा, "16 अप्रैल से संसद में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से संबंधित एक ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है। यह विशेष सत्र हमारे लोकतंत्र को और मजबूत बनाने का एक अवसर है। यह एक ऐसा क्षण भी है जब हम सभी मिलकर आगे बढ़ने और सबको साथ लेकर चलने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहरा सकते हैं। मैं इसी भावना और उद्देश्य के साथ आपको यह पत्र लिख रहा हूं।"

प्रधानमंत्री ने संसद के सदस्यों से अपील की कि वे इस विधेयक को एक आवाज में पारित करने के लिए पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर एकता का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा, "मैं यह पत्र इसलिए लिख रहा हूं ताकि हम सभी एक आवाज में इस संशोधन को पारित करने के लिए एकजुट हों। यह अच्छा होगा कि अधिक से अधिक संसद सदस्य संसद में इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करें। यह क्षण किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है। यह महिलाओं और हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी दिखाने का समय है। चूंकि सभी राजनीतिक दल लंबे समय से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की इच्छा का इज़हार करते रहे हैं, इसलिए अब इस इच्छा को वास्तविकता में बदलने का यह सही समय है। यह देश की नारी शक्ति और 140 करोड़ हिंदुस्तानियों के लिए एक बड़ी जीत होगी। मुझे पूरा विश्वास है कि हम सभी मिलकर संसद में इस ऐतिहासिक काम को पूरा करेंगे।"

उन्होंने समाज के विकास के लिए महिलाओं के विकास और उन्हें निर्णय लेने में भागीदार बनाने पर जोर देते हुए कहा, "कोई भी समाज तब तक विकसित नहीं होता जब तक महिलाओं को विकसित होने, निर्णय लेने और सबसे महत्वपूर्ण, नेतृत्व करने का अवसर नहीं मिलता। भारत को एक विकसित देश बनाने के अपने दृष्टिकोण को साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि महिलाएं इस यात्रा में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं। आज हम सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देख रहे हैं। अंतरिक्ष से लेकर खेलों तक, सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्टअप्स तक, भारत की बेटियां हर क्षेत्र में अपने निशान छोड़ रही हैं। अपनी मेहनत और संकल्प के बल पर वे अपनी क्षमताओं को साबित कर रही हैं।"

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से चर्चा में रहा है और अब इसे पूरा करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, "संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से चर्चा का विषय रहा है। वर्ष 2023 में विभिन्न दलों के संसद सदस्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में संसद में एकजुट हुए। वह एक यादगार क्षण था जिसने हमारी एकता को प्रदर्शित किया। पूरी दुनिया ने देखा कि देश की महिलाओं के प्रति एक वादे को पूरा करने के लिए कैसे सामूहिक रूप से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। महिलाएं हमारी आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं और यह राजनीतिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। मैं उस दिन को भारत के संसदीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली मील का पत्थर मानता हूं।"

श्री मोदी ने कहा कि कई संसद सदस्यों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा में भाग लिया। इन परामर्शों के दौरान इसके क्रियान्वयन के समय पर भी चर्चा हुई। इस बात पर व्यापक सहमति थी कि इस ऐतिहासिक कानून के प्रावधानों को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। कई दलों के नेताओं की भी यही राय थी। हाल ही में हमने इस विषय पर विशेषज्ञों से परामर्श किया है। हमने संविधानिक मामलों के विशेषज्ञों से सुझाव और मार्गदर्शन प्राप्त किया है। हमने राजनीतिक दलों के साथ भी वार्ता की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अब समय आ गया है कि पूरे देश में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को उसके मूल भावना के अनुसार लागू किया जाए। यह आवश्यक है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ आयोजित किए जाएं। इससे भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों में नई ऊर्जा पैदा होगी और जनता का विश्वास मजबूत होगा। यह शासन में और अधिक भागीदारी और
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