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हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं हो सकी
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हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं हो सकी

Awaz E Bihar•24 जुलाई 2026 को 05:03 pm बजे•9 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों ने शुक्रवार को लोकसभा में जमकर हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
दोपहर 12 बजे, एक बार स्थगित होने के बाद जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। शोर-शराबे के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन से संबोधन करने की कोशिश की, जिस पर अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने उन्हें बोलने की अनुमति दी।
श्री रिजिजू ने कहा कि "विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी आज सदन में मौजूद हैं। मैं उनसे अपील करता हूं कि वे सबसे बड़ी विपक्षी दल के नेता होने के नाते और प्रधानमंत्री की ओर से पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के ऐलान के बाद, इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने में सहयोग करें।"
उन्होंने कहा कि जब सरकार सख्त कानून बनाने जा रही है, पेपर लीक रोकने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है और उसकी मंशा मजबूत कानून बनाने की है, तो विपक्ष को भी चर्चा में सहयोग करना चाहिए। उनके अनुसार राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के रूप में इस दिशा में पहल करनी चाहिए, क्योंकि अगर इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होती है तो इसका गलत संदेश जाएगा।
श्री रिजिजू की अपील के बावजूद विपक्षी दलों ने हंगामा जारी रखा। इसके बाद अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने भी कहा कि जब सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो विपक्ष को भी इसके लिए तैयार रहना चाहिए और सदस्यों को अपनी सीटों पर वापस जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए। उनका कहना था कि आज महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने हैं, इसलिए सदस्यों को अपनी सीटों पर जाकर सदन की कार्यवाही चलाने में सहयोग करना चाहिए। लेकिन हंगामे के चलते उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।
इसके पहले सुबह 11 बजे लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने सवाल पूछने के सत्र की शुरुआत होते ही सदन को करगिल विजय दिवस के बारे में अवगत कराया और सदन की ओर से करगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
इसके बाद जैसे ही अध्यक्ष ने सवाल पूछने के सत्र की शुरुआत करने का ऐलान किया, विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी और हंगामा करने लगे। श्री बिरला ने सदस्यों से शोर-शराबा न करने और सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की, लेकिन सदस्यों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
अध्यक्ष ने कहा कि सवाल पूछने का सत्र सदन की सबसे महत्वपूर्ण कार्यवाही होती है, जिसके माध्यम से सदस्य सवाल पूछते हैं और सरकार को जवाबदेह बनाते हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिस विषय पर विपक्ष चर्चा चाहता है, उस पर नियमों के अनुसार चर्चा की अनुमति दी जाएगी और सदस्यों से सदन चलाने में सहयोग करने का अनुरोध किया।
लेकिन अध्यक्ष की बार-बार अपील के बावजूद हंगामा समाप्त नहीं हुआ, जिसके कारण पहले कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई, और बाद में फिर से हंगामा होने पर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण शुक्रवार को राज्यसभा में भी लगातार पांचवें दिन सवाल पूछने का सत्र नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
इसके पहले भी इसी मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण शून्य घंटे की कार्यवाही नहीं हो सकी थी। संसद के वर्तमान मानसून सत्र का आज पांचवां दिन है, लेकिन अब तक सदन में कोई नियमित कार्यवाही नहीं हो सकी है।
एक बार स्थगित होने के बाद जब दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर हंगामा करने लगे। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति एससी राधा कृष्णन से विचार व्यक्त करने की अनुमति मांगी, जिस पर सभापति ने कहा कि "आपकी अपनी पार्टी के सदस्य ही अपनी सीटों पर नहीं बैठ रहे हैं, ऐसे में मैं क्या कर सकता हूं?"
इसके बाद जैसे ही श्री खड़गे ने बोलना शुरू किया, सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने भी शोर-शराबा शुरू कर दिया। सभापति ने हाथ के इशारे से उन्हें शांत रहने का निर्देश दिया।
दोनों ओर से जमकर हंगामे के दौरान श्री खड़गे ने कहा कि "मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि सबसे पहले शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और प्रधानमंत्री को संसद में आकर बयान देना चाहिए, उसके बाद हम चर्चा करेंगे।" उनके यह कहते ही सभापति एससी राधा कृष्णन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
इसके पहले सुबह 11 बजे भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट परीक
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