तमिलनाडु शराब घोटाला : मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री सेंथल बालाजी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी
Awaz E Bihar••33 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को डीएमके के प्रभावशाली नेता और पूर्व मंत्री वी सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्हें 1000 करोड़ रुपये के तामिलनाडु शराब घोटाले में गिरफ्तार किए जाने की संभावना बढ़ गई है। यह मामला निदेशालय विजिलेंस एंड एंटी करप्शन (डीवीएसी) द्वारा दर्ज किया गया है। सेंथिल बालाजी ने तब उच्च न्यायालय का रुख किया जब डीवीएसी ने एक दिन पहले चेन्नई सहित राज्य के विभिन्न जिलों में कई स्थानों पर छापे मारे थे। इन कार्रवाइयों में तिरुवारूर जिले के मनारगुडी में स्थित डीएमके सांसद टीआर बालू की डिस्टलरी भी शामिल थी। ये छापे कथित तौर पर बड़े पैमाने पर शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में किए गए थे। इस घटनाक्रम ने विपक्षी दल डीएमके को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है, जबकि 5 अगस्त से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले सत्तारूढ़ तमिलगा वीटरी कढ़गम (टीवीके) को राजनीतिक हमलों का मौका दे दिया है। न्यायमूर्ति जीके इलांथिरायन ने मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों और याचिका के उस तर्क को स्वीकार करते हुए कि जांच प्रारंभिक चरण में है और आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है, सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिका के अनुसार आरोपी ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया है। कोयंबत्तूर दक्षिण से वर्तमान विधायक सेंथिल बालाजी ने तब अदालत का रुख किया जब डीवीएसी ने मंगलवार को उनके और छह अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2021 से 2025 के बीच सरकारी संस्था तामिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (टास्मैक) में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं। इस अवधि के दौरान सेंथिल बालाजी के पास शराब उत्पादन और आबकारी और बिजली के विभाग थे। डीवीएसी की एफआईआर के अनुसार, मंत्री के रूप में सेंथिल बालाजी ने छह अन्य लोगों, जिनमें निजी व्यक्ति, डिस्टलरी और ब्रूअरी कंपनियां, बोतल भरने और परिवहन कंपनियां और टास्मैक के कुछ अधिकारी शामिल हैं, के साथ मिलकर सरकारी धन में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की साजिश रची और बाद में इस राशि को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से छुपाया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सेंथिल बालाजी ने अदालत में तर्क दिया कि वे निर्दोष हैं और यह मामला वर्तमान सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा पिछले साल सितंबर में कोयंबत्तूर में हुए करूर भीड़ हिंसा में 41 लोगों की मौत के मामले में राजनीतिक बदले के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि याचिका ने किसी विशिष्ट टेंडर या अनुबंध का विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। उनका कहना था कि उनके खिलाफ पहले दर्ज किए गए कथित विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले के तुरंत बाद यह मामला दर्ज किया गया है, जो राजनीतिक दुश्मनी का प्रमाण है। सेंथिल बालाजी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील एनआर एलंगो ने तर्क दिया कि टास्मैक एक स्वायत्त संस्था है और मंत्री का इसके दैनिक कार्यों या टेंडर प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं होती है, इसलिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टास्मैक के कार्यालयों पर जो छापे मारे थे, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है और अदालत ने अस्थायी रोक लगा रखी है। इसके जवाब में राज्य के लोक अभियोजक जॉन सथियन ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट का अस्थायी आदेश केवल टास्मैक संस्था से संबंधित है, जो सेंथिल बालाजी या अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता है। उन्होंने कहा कि सरकारी खजाने को हुआ नुकसान 1000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। पूरे राज्य में 41 स्थानों पर दिनभर चले छापों, जिनमें करूर में सेंथिल बालाजी से जुड़े स्थान और चेन्नई में उनके होटल के कमरे पर कार्रवाई भी शामिल थी, के बाद डीवीएसी ने बुधवार की रात उनके और छह अन्य लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए। पूर्व मंत्री के अलावा पूर्व टास्मैक प्रबंध निदेशक एस विसाकन, पूर्व वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक टी रामादोराई मरुगन और एआर पनीरसेल्वम, सेंथिल बालाजी के पूर्व व्यक्तिगत सहायक भास्कर, उनके करीबी साथी राठेश राज शानमुगवेल और एरोड के केएस कार्तिक उर्फ मलानूर कार्तिक के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं। डीवीएसी के अनुसार विभिन्न डिस्टलरी और ब्रूअरी कंपनियों, परिवहन कंपनियों, बोतल भरने वाली कंपनियों, टास्मैक के कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के खिलाफ भी मामले दर्ज कर जांच जारी है।