अगले पांच वर्षों में देश का निर्यात 2000 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य : पीयूष गोयल
Awaz E Bihar••29 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात व्यवसाय को आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण पहचान बताते हुए सोमवार को कहा कि अगले पांच वर्षों में देश के निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो जाएगा। श्री गोयल ने निर्यात व्यवसाय में विस्तार को 'आत्मनिर्भर भारत' की असली पहचान बताते हुए कहा कि वस्तुओं और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में भारत ने प्रगति दर्ज की है, जो वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में एक बड़ी उपलब्धि है। वे यहां 'भारत मंडप' में आयोजित 'भारतीय व्यापार महोत्सव' की वेबसाइट के उद्घाटन समारोह से संबोधित कर रहे थे। अमेरिकी आयात शुल्क और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय मंत्री ने सभी संबंधित पक्षों से 'भारतीय व्यापार महोत्सव' को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करने की अपील की और इस आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। यह व्यापार मेला 12 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा। निर्यात क्षेत्र को सरकार की ओर से पूरा सहयोग का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि निर्यात का यह लक्ष्य केवल सरकार का नहीं बल्कि सभी का है। उन्होंने आगे बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में जो व्यापार समझौते किए गए हैं, उनके तहत लगभग 38 विकसित देशों के साथ 'मुक्त व्यापार समझौते' (एफटीए) की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इन समझौतों के परिणामस्वरूप भारतीय उत्पादों को बड़े वैश्विक बाजारों तक प्राथमिकता प्राप्त पहुंच मिलेगी, जहां भारतीय सामान अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम आयात शुल्क पर बेचा जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये समझौते चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। उन्होंने सूचित किया कि ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) जून से लागू हो सकता है, जबकि अन्य समझौते कागजी कार्रवाई की औपचारिक आवश्यकताओं के पूरा होने के बाद लागू कर दिए जाएंगे। श्री पीयूष गोयल ने सभी व्यावसायिक और संबंधित हलकों पर जोर दिया कि वे वाणिज्य मंत्रालय के 'व्यापार पोर्टल' के माध्यम से आयात के रुझानों का बारीकी से अध्ययन करें ताकि स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को बढ़ाने और आयात के विकल्प खोजने के अवसरों की पहचान की जा सके।