गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026
اردوहिन्दीEnglish
आवाज़ ए बिहार
आवाज़ ए बिहार
होमई-पेपरवीडियोराष्ट्रीयराजनीतिखेलशिक्षाबिहारराष्ट्रीयराजनीतिखेलस्वास्थ्यशिक्षालेखविश्व समाचार
टॉपराष्ट्रीयराजनीतिखेलशिक्षाबिहारराष्ट्रीयराजनीतिखेलस्वास्थ्यशिक्षालेखविश्व समाचार

आवाज़ ए बिहार

बिहार की आवाज़ — उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी में ताज़ा खबरें

श्रेणियाँ

  • स्थानीय
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • व्यापार
  • प्रौद्योगिकी
  • खेल
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा

त्वरित लिंक

  • होम
  • ई-पेपर
  • वीडियो
  • आज की तस्वीर
  • हमारे बारे में
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • नियम और शर्तें

न्यूजरूम

  • संपादकीय नीति
  • सुधार और शिकायतें
  • विज्ञापन
  • न्यूजरूम संपर्क

भाषाएँ

  • اردو (Urdu)
  • हिन्दी (Hindi)
  • English

हमें फॉलो करें

Email: awazebihar@gmail.com

Phone: +91-9473486854

© 2026 Awaz E Bihar Publications. सर्वाधिकार सुरक्षित

Designed and Developed byZeloiteZeloite
महंगाई का संकट केवल युद्ध का परिणाम नहीं है, बल्कि यह मोदी सरकार की गलत विदेश नीतियों का परिणाम है: कांग्रेस
  1. होम
  2. राष्ट्रीय
राष्ट्रीय

महंगाई का संकट केवल युद्ध का परिणाम नहीं है, बल्कि यह मोदी सरकार की गलत विदेश नीतियों का परिणाम है: कांग्रेस

Awaz E Bihar•18 मई 2026 को 04:47 pm बजे•11 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के बाद महंगाई की नई लहर ने आम आदमी की मुश्किलों में और इजाफा कर दिया है। ईंधन महंगा होने के कारण खाद्य तेल, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि की आशंका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता को किफायत और बलिदान की सलाह दिए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंधे ने कहा है कि वर्तमान महंगाई केवल ईरान युद्ध का परिणाम नहीं है, बल्कि यह मोदी सरकार की पिछले 12 वर्षों की असफल आर्थिक और विदेश नीतियों का सीधा प्रभाव है। तलक भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अतुल लोंधे ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद 144 माह में से 140 माह भारत का आयात-निर्यात संतुलन नकारात्मक रहा है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार 112 अरब डॉलर नकारात्मक हो गया है, क्योंकि भारत चीन से अधिक आयात और कम निर्यात कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापार पहले सकारात्मक था, लेकिन एपस्टीन फाइल, अडानी को दी गई छूट और अमेरिका के साथ किए गए व्यापारिक समझौतों के बाद स्थिति बदल गई है, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय किसानों को होगा। अतुल लोंधे ने कहा कि अब भारत अमेरिका के साथ 500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य निर्धारित कर रहा है, लेकिन यह भी नकारात्मक संतुलन की ओर जाएगा। उन्होंने कहा कि रुपये की कीमत लगातार गिर रही है। 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी, तब एक डॉलर की कीमत 58 रुपये थी, जो अब बढ़कर 95 रुपये हो गई है और जल्द ही 100 रुपये तक पहुंच सकती है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यूपीए सरकार के दौरान जब कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल थी, तब पेट्रोल 72 रुपये, डीजल 58 रुपये और गैस सिलेंडर 412 रुपये में उपलब्ध था, लेकिन आज कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर होने के बावजूद पेट्रोल 100 रुपये से ऊपर और गैस सिलेंडर एक हजार रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने पूछा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद 35 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल देने का वादा किया था, उसका क्या हुआ? उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं, जबकि 'मेक इन इंडिया', 'स्मार्ट सिटी' और मैन्युफैक्चरिंग जैसे बड़े परियोजनाएं पूरी तरह से असफल हो गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर देश की आर्थिक स्थिति वास्तव में बेहतर है तो पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें क्यों लग रही हैं? अतुल लोंधे ने आगे कहा कि रूस और ईरान भारत को रुपये में तेल उपलब्ध करा रहे थे, लेकिन अमेरिका के दबाव के कारण अब भारत वह तेल नहीं खरीद पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस से सस्ता तेल खरीदने का फायदा केवल मुकेश अंबानी की रिलायंस और नायरा कंपनी को हुआ, जनता को नहीं। उन्होंने कहा कि यूपीए के दौरान एक्साइज ड्यूटी केवल 3 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 33 रुपये तक पहुंचाया गया और इसके माध्यम से लाखों करोड़ रुपये कमाए गए। उन्होंने कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें कम थीं तब भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम नहीं की गईं। 2015 में सरकार ने ईंधन का स्थानीय उत्पादन बढ़ाकर आयात कम करने की घोषणा की थी, लेकिन वह भी असफल साबित हुई और अब भारत का तेल आयात 89 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने पेट्रोल 15 रुपये प्रति लीटर करने का दावा किया था। नेट पेपर लीक मामले पर बात करते हुए अतुल लोंधे ने कहा कि इस घोटाले ने देश के 23 लाख छात्रों के सपने चकनाचूर कर दिए हैं, जबकि 4 छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। उन्होंने कहा कि यह आत्महत्याएं नहीं बल्कि सरकार द्वारा किए गए हत्याएं हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए था, लेकिन अब तक न तो उनके खिलाफ और न ही एनटीए के महानिदेशक के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि सीबीआई की कार्रवाई महज औपचारिक कार्रवाई बनकर रह गई है जबकि असली दोषी आज भी आजाद घूम रहे हैं। अतुल लोंधे ने याद दिलाया कि 2014 में भी नेट पेपर लीक हुआ था, उस समय भी सीबीआई जांच हुई थी, लेकिन उसका परिणाम आज तक सामने नहीं आया है।
साझा करें:

More from राष्ट्रीय

राष्ट्रीय

29 सित॰ 2026
भारत की कमजोरी नहीं शांति की नीति, आतंकवाद पर उठाएंगे जरूरी कदम: राजनाथ
राष्ट्रीय

भारत की कमजोरी नहीं शांति की नीति, आतंकवाद पर उठाएंगे जरूरी कदम: राजनाथ

27 सित॰ 2026
एसआईआर का फैसला सर्वसम्मत, कैबिनेट सचिव को लिखा पत्र किसी नीति से संबंधित नहीं: चुनाव आयोग
राष्ट्रीय

एसआईआर का फैसला सर्वसम्मत, कैबिनेट सचिव को लिखा पत्र किसी नीति से संबंधित नहीं: चुनाव आयोग

26 सित॰ 2026
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग के पक्ष में कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन
राष्ट्रीय

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग के पक्ष में कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन

25 सित॰ 2026
ज्ञानेश कुमार ने दो दिन में इस्तीफा नहीं दिया तो देशव्यापी आंदोलन होगा: सीजेपी
राष्ट्रीय

ज्ञानेश कुमार ने दो दिन में इस्तीफा नहीं दिया तो देशव्यापी आंदोलन होगा: सीजेपी

24 सित॰ 2026
चुनाव आयोग की 14 आपत्तियों पर स्पष्टीकरण, असहमति को सामान्य बताया
राष्ट्रीय

चुनाव आयोग की 14 आपत्तियों पर स्पष्टीकरण, असहमति को सामान्य बताया

23 सित॰ 2026