अमेरिका ने ईरान से २० वर्ष तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का आग्रह किया, वार्ता में गतिरोध जारी
Awaz E Bihar••4 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता में यूरेनियम संवर्धन का मुद्दा सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया, जहां अमेरिका ने 20 वर्षों तक संवर्धन रोकने की मांग की। विदेशी वेबसाइट 'एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने ईरान से मांग की कि वह दो दशकों तक यूरेनियम की संवर्धन बंद करे। यह मांग चालू सप्ताह इस्लामाबाद में हुई वार्ता के दौरान सामने आई, जिसके जवाब में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपेक्षाकृत कम अवधि अर्थात लगभग 10 वर्षों के लिए संवर्धन रोकने का प्रस्ताव रखा।
सूत्रों के अनुसार ईरान के परमाणु कार्यक्रम, विशेष रूप से यूरेनियम संवर्धन और मौजूदा भंडार का मुद्दा किसी भी संभावित समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। अमेरिका ने यह भी मांग की कि ईरान अपने अधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार देश से बाहर स्थानांतरित करे, हालांकि ईरान ने इसके बजाय संवर्धन के स्तर को कम करने और निगरानी प्रणाली को स्वीकार करने की इच्छा व्यक्त की।
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार वाशिंगटन और तेहरान के बीच संपर्क का दरवाजा अभी भी खुला है और समझौते की ओर कुछ प्रगति भी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 घंटे तक जारी रहने वाली वार्ता गतिरोध का शिकार होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए होरमुज़ जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी का एलान किया।
क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थता की भूमिका में दोनों देशों के बीच संपर्क बनाए हुए हैं ताकि मतभेदों को कम किया जा सके और 21 अप्रैल को युद्धविराम के समाप्त होने से पहले किसी समझौते तक पहुंचा जा सके। सूत्रों का कहना है कि पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि समझौता संभव है और जल्द ही नई वार्ता का आयोजन भी अपेक्षित है।
एक क्षेत्रीय सूत्र के अनुसार वार्ता पूरी तरह से असफल नहीं हुई, बल्कि इस समय दोनों पक्ष समझौते के चरण में हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की कि अगर ईरान और अधिक लचीलापन दिखाए और इस्लामाबाद में प्रस्तुत प्रस्तावों को स्वीकार करे, तो समझौता अभी भी संभव है।
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेज़ा अमीरी मुकर्रम ने भी कहा कि वार्ता असफल नहीं हुई, बल्कि उन्होंने एक राजनयिक मार्ग प्रदान किया है जिसे विश्वास और राजनीतिक संकल्प के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। वार्ता के दौरान सबसे महत्वपूर्ण असहमति ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रही, जहां अमेरिका ने संवर्धन रोकने और भंडार समाप्त करने की मांग की, जबकि ईरान ने इसके बदले में जमे हुए वित्तीय संपत्ति की बहाली को एक महत्वपूर्ण शर्त बनाई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म "ट्रुथ सोशल" पर जारी बयान में कहा कि ईरान को भारी हार का सामना करना पड़ा है और इसके संबंध में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को खारिज करते हुए अखबार से माफी की मांग भी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार प्राप्त करने की अनुमति नहीं देगा और कोई भी समझौता इस मूलभूत शर्त पर होगा।
ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर युद्धविराम की निर्धारित अवधि तक कोई समझौता नहीं हो पाया, तो स्थिति ईरान के लिए और अधिक खराब हो सकती है और तनाव बना रहेगा। उन्होंने पहले भी चेतावनी जारी की थी कि अगर ईरान की तेज़ गति वाली नौकाएं अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास करेंगी, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।
अपने एक बयान में उन्होंने दावा किया कि ईरानी नौसेना को गंभीर नुकसान पहुंच चुका है और कई जहाज़ नष्ट किए जा चुके हैं, जबकि अमेरिकी सेना समुद्र में सख्त निगरानी जारी रखे हुए है। ट्रम्प ने कहा कि होरमुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जारी है और एक दिन में 34 जहाजों का गुजरना इस बात का प्रमाण है कि मार्ग सक्रिय है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, हालांकि अमेरिका किसी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि परमाणु वार्ता गतिरोध का शिकार हो गई है और अब होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है।
इस बीच, अमेरिकी कांग्रेस की खुफिया समिति के प्रमुख के अनुसार ट्रम्प ने चीन को भी चेतावनी दी है कि वह ईरान को फिर से हथियार न दे। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी लगाने का एलान किया है, जो इस्लामाबाद वार्ता की असफलता के बाद सामने आया, जबकि ईरान ने इसे समुद्री डाकूपन करार दिया है।