उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हंगामेदार होने की संभावना
Awaz E Bihar••21 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होगा। सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक और हंगामे की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी जहां अपनी सरकार के पिछले 10 साल की उपलब्धियों को सदन में पेश करेगी, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी, कानून-व्यवस्था की स्थिति और जनहित से संबंधित अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं।
विपक्ष के नेता और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडे ने कहा कि विपक्ष पूरी तरह से तैयार है और राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी का मामला सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सत्र की अवधि को कम रखकर अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहती है। सावन के महीने और कांवड़ यात्रा के मद्देनजर सरकार की ओर से किए गए प्रस्तावित इंतजामات और दिशा-निर्देशों को लेकर भी विपक्ष के सरकार को घेरने की संभावना जताई जा रही है।
विधानसभा के संभावित कार्यक्रम के अनुसार पहले दिन दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी जा सकती है। 4 अगस्त को अनुपूरक बजट पेश किए जाने की संभावना है। 5 अगस्त को विधायी कार्य और अन्य सरकारी कार्य किए जाएंगे, जबकि 6 अगस्त को अनुपूरक बजट पर चर्चा के बाद सत्र की कार्यवाही पूरी होने की संभावना है।
कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने भी कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी का मामला गंभीर है और सरकार को इसका जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भी जनहित से संबंधित कई मुद्दे सदन में उठाए जाएंगे। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को विधानसभा भवन में आयोजित सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी दलों से सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने और जनहित के मुद्दों पर स्वस्थ और अर्थपूर्ण चर्चा करने की अपील की। वहीं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करने का अनुरोध किया।
इस बीच सत्र की शुरुआत से पहले सर्वदलीय बैठक में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में आम लोगों से संबंधित विषयों पर सकारात्मक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन जनता की समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी मंच है और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता के हित से जुड़े हर मुद्दे को गंभीरता से सदन में उठाएं।
मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से चलाने के लिए सभी सदस्यों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ चर्चा और रचनात्मक संवाद से राज्य को विकास की नई गति मिलेगी और जनहित के कार्यों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
बैठक में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी सभी दलों के नेताओं और सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और कार्यवाही को सौहार्दपूर्ण तरीके से चलाने में सहयोग करने की अपील की। सर्वदलीय बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, नेता विपक्ष रामगोविंद चौधरी, मंत्री डॉ. संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर, कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा, जनता दल (लोकतांत्रिक) के नेता रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया', निषाद पार्टी के रमेश सिंह, अपना दल (सोनेलाल) के आरके पटेल और राष्ट्रीय लोक दल के राज पाल बलियान समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे।