नालंदा समेत सात जिलों के लिए इको टूरिज्म मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा
Awaz E Bihar••41 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
पटना : (एबीएन) राज्य सरकार ने राज्य के प्राकृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने राज्य के महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के समग्र विकास के लिए एक व्यापक 'इको टूरिज्म मास्टर प्लान' तैयार करने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण में नालंदा सहित सात जिलों को शामिल किया गया है, जो बिहार में प्राकृतिक पर्यटन के परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए तैयार है।
पहले चरण के तहत चुने गए सात जिलों के वन, पहाड़ियों और झरनों को विकसित किया जाएगा और अन्य जिलों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रारंभिक चरण में शामिल जिले नालंदा, कैमूर, पश्चिमी चंपारण, अररिया, किशनगंज, बांका और सहरसा हैं। हाल के वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि नालंदा ने राज्य में सबसे अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया है। इसे ध्यान में रखते हुए, नालंदा को इस मास्टर प्लान के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में नामित किया गया है। इस योजना के तहत राजगीर पहाड़ियों के प्राकृतिक संसाधन, नेचर सफारी, जू सफारी, और घोरकटोरा झील के साथ-साथ आसपास के हरित क्षेत्रों को आधुनिक और आकर्षक स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
मूल उद्देश्य पर्यटकों के प्रवास की अवधि को बढ़ाना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए सीधे अधिकतम लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। जमीनी स्तर पर परियोजना को वास्तविक रूप देने से पहले प्रत्येक जिले की प्राकृतिक और पर्यटन क्षमता का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर विकासात्मक गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। चुने गए पर्यटन स्थलों पर, सुलभ सड़क संपर्क, व्यवस्थित पार्किंग, आधुनिक सूचना केंद्र, सफाई के मजबूत प्रबंधन, सुरक्षित ट्रैकिंग मार्ग, आराम के क्षेत्र और अन्य आवश्यक पर्यटन सुविधाएं जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
पर्यटन विभाग का विचार है कि पारिस्थितिक पर्यटन केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। बल्कि, यह पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के लिए एक शक्तिशाली साधन के रूप में कार्य करता है। स्थानीय युवा, स्वयं सहायता समूह, और छोटे व्यवसायी व्यक्ति इन गतिविधियों में सीधे शामिल होंगे, जिससे नए और सतत रोजगार के अवसर पैदा होंगे। डीएफओ राजकुमार मोहन ने बताया कि जिले में 11 जल संचय को पारिस्थितिक पर्यटन के विकास के लिए चुना गया है। इसके अलावा, संभावित विकासात्मक कार्यों का रूपरेखा तैयार करके विभाग को प्रस्तुत किया गया है। इस समय अधिकारिक स्तर पर मास्टर प्लान के गठन की प्रक्रिया जारी है।