आत्मनिर्भर भारत अभियान में कोरियाई व भारतीय कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी : राजनाथ सिंह
Awaz E Bihar••18 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा संबंधों को मजबूत करने और सिद्धांतों पर आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। दोनों देशों ने रक्षा साइबर, प्रशिक्षण और संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के क्षेत्रों में सहयोग के समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
दक्षिण कोरिया की दो दिवसीय यात्रा पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को सियोल में कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आं ग्यू-बेक के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की और उद्योग, उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों, सैन्य आदान-प्रदान, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और कोरिया के क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टिकोण के बीच बढ़ते तालमेल को स्वीकार करते हुए एक स्वतंत्र, खुले, व्यापक और सिद्धांतों पर आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा उद्देश्यों के अनुसार रक्षा संबंधों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। रक्षा सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो द्विपक्षीय साझेदारी के बढ़ते दायरे और गहराई को दर्शाते हैं।
रक्षा साइबर के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने, भारत के राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज और कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच प्रशिक्षण, और संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना के सहयोग पर समझौतों का आदान-प्रदान किया गया, जिससे साझेदारी मजबूत और बहुस्तरीय हो गई। रक्षा मंत्री ने कोरिया के डिफेंस एक्यूजेशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन के मंत्री ली यंग-चुल से भी मुलाकात की, और दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से विकास, उत्पादन और निर्यात के मार्ग को सुगम बनाने के प्रयासों पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के 'इनोवेशन इकोसिस्टम' को एक साथ लाने के लिए भारत-कोरिया डिफेंस इनोवेशन एक्सीलरेटर इकोसिस्टम की क्षमताओं से लाभ उठाने के रोडमैप पर चर्चा की गई। बाद में श्री सिंह ने भारत-कोरिया डिफेंस इंडस्ट्री बिजनेस राउंड टेबल की अध्यक्षता की, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधि एक साथ आए। इस चर्चा ने रक्षा निर्माण, संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला की साझेदारी में नए अवसरों की तलाश के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
व्यापार जगत की प्रमुख हस्तियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने भारत के बढ़ते रक्षा औद्योगिक प्रणाली और सरकार के कदमों के तहत उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य स्थानीय रक्षा निर्माण और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना है। उन्होंने कोरियाई रक्षा कंपनियों को भारतीय उद्योग के साथ संपर्क मजबूत करने और दीर्घकालिक रूप से परस्पर लाभकारी सहयोग में अपना योगदान देने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कोरियाई और भारतीय कंपनियों के उत्साह की सराहना की। श्री सिंह ने कहा, "व्यापारिक क्षेत्र में भारत-कोरिया औद्योगिक सहयोग की सफलता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक और विश्वसनीय साझेदारी की महान क्षमता को दर्शाती है। अब इस सफल मॉडल को रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ाने का समय आ गया है, जहां प्रौद्योगिकी, नवाचार, निर्माण क्षमता और रणनीतिक विश्वास तेजी से आपस में जुड़ रहे हैं। कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता, भारत के पैमाने, प्रतिभा, निर्माण प्रणाली और नवाचार की क्षमताओं के साथ मिलकर सहयोग के लिए एक मजबूत आधार बनाती है। साथ मिलकर, हमारे दोनों देश भविष्य के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी और रक्षा प्रणालियों को संयुक्त रूप से विकसित और उत्पादित कर सकते हैं। तकनीकी रूप से मजबूत देशों के बीच विश्वसनीय साझेदारी का बहुत अधिक रणनीतिक महत्व है। भारत और दक्षिण कोरिया इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में साथ मिलकर काम करने के लिए एक विशेष स्थिति में हैं।"
श्री सिंह ने जोर देकर कहा कि रक्षा निर्माण अब केवल पारंपरिक प्लेटफार्मों और उपकरणों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि आधुनिक रक्षा प्रणाली उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), स्वायत्त प्रणाली, साइबर प्रौद्योगिकी, सेंसर, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री और अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं से संचालित होती हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र का भविष्य तेजी से नए प्रयोगों और कई क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। यही क्षेत्र है जहां भारत और कोरिया के पास सहयोग के बहुत अधिक अवसर हैं।