दिल्ली दंगे: अंकित शर्मा हत्या मामले में ६ मुस्लिम युवक बरी
Awaz E Bihar••14 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में कड़कड़डूमा अदालत ने छह साल से अधिक समय तक चली कानूनी कार्यवाही के बाद अपना फैसला सुनाते हुए छह मुस्लिम युवाओं को सभी आरोपों से बरी कर दिया है, जबकि मामले में पांच अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। अदालत के फैसले के बाद बरी हुए युवाओं के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने कानूनी सहायता प्रदान करने पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असाद मदनी का आभार व्यक्त किया।
न्यायिक फैसले के अनुसार, फिरोज, समीर, हुसैन उर्फ मुल्ला जी उर्फ सलमान, गुलफाम, शोएब आलम उर्फ बाबी और मंटोजम उर्फ मूसा को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। मामले में कुल ग्यारह लोगों को आरोपी बनाया गया था। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से एडवोकेट अब्दुल गफार ने चार आरोपियों की कानूनी पैरवी की, जिनमें फिरोज और समीर भी शामिल थे, जो अब अदालत से बरी कर दिए गए हैं।
एडवोकेट अब्दुल गफार ने बताया कि अदालत ने छह लोगों को आरोपों से बरी किया है, जबकि बाकी आरोपियों को उच्च अदालत से संपर्क करने और अपनी बेगुनाही साबित करने का कानूनी अधिकार है। उन्होंने कहा कि लंबी अदालती कार्यवाही के दौरान रक्षा टीम ने कानूनी और दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर मामले की पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप कई आरोपियों को न्याय मिला।
यह स्पष्ट है कि 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। 25 फरवरी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के 26 वर्षीय अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे, जबकि अगले दिन उनका शव खजूरी खास के एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई घावों की पहचान की गई थी। उनके पिता की शिकायत के आधार पर पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को मामले का मुख्य आरोपी बनाया गया था और पुलिस ने दस अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अनुसार, ऐसे संवेदनशील मामलों में जहां वास्तविक अपराधियों को कानून के अनुसार सजा मिलना आवश्यक है, वहीं निर्दोष लोगों को न्याय की प्रदान करना और प्रभावी कानूनी रक्षा भी संवैधानिक और कानूनी आवश्यकता है। इस उद्देश्य के तहत संगठन पिछले कई वर्षों से दिल्ली दंगों से संबंधित कई मामलों में कानूनी सहायता प्रदान कर रहा है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि दिल्ली दंगों से संबंधित दो सौ से अधिक लंबित मामलों में संगठन कानूनी पैरवी कर रहा है, जबकि इसके कानूनी संघर्ष के परिणामस्वरूप अब तक सौ से अधिक लोग विभिन्न मामलों में बरी हो चुके हैं। संगठन के अनुसार, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए भी निरंतर सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। बरी हुए युवाओं के परिवार ने इस अवसर पर मौलाना महमूद असाद मदनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में उन्हें कानूनी और नैतिक सहायता प्रदान की गई, जिसके लिए वे बहुत आभारी हैं।