पटना, 23 सितंबर (एबीएन) बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने बुधवार को चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और बिहार और पश्चिम बंगाल में फिर से चुनाव कराने की मांग की। श्री यादव ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दबाव में दोनों राज्यों में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया है. विपक्षी नेता ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये हैं. उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को इन आपत्तियों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हाल ही में आई एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह सिंधु और विवेक जोशी के कई फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. राजद नेता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक हितों के अनुरूप संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। राजद नेता ने कहा कि उनकी पार्टी बिहार में मतदाता सूची के विशेष व्यापक पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान सवाल उठाने वाली पहली पार्टी थी और न्याय के लिए मामले को उच्चतम न्यायालय में ले जाया गया था। श्री यादव ने आरोप लगाया कि बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाता सूची से संबंधित निर्णय लेने के लिए एसआईआर प्रक्रिया का मनमाने ढंग से उपयोग किया गया था. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष व्यापक पुनरीक्षण के संबंध में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपील की है. चुनाव आयोग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में हटाए गए 27.16 लाख नामों में से 22.21 लाख मतदाताओं ने अपना नाम दोबारा जोड़ने की अपील की है. विपक्ष के नेता ने कहा कि चुनाव परिणाम और मतदान रिकार्ड को सुरक्षित रखने की अवधि में किये गये बदलाव पर भी सवाल उठाये गये. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बदलाव से चुनावी प्रक्रिया की जांच और शिकायतों के निवारण की संभावना प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका होती थी, लेकिन केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव कर चयन समिति का ढांचा बदल दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा हो गया है. श्री यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं के खाते में पैसे भेजे जाने का जिक्र किया और कहा कि विपक्ष की आपत्तियों पर चुनाव आयोग ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और नतीजों को सत्तारूढ़ दल के पक्ष में प्रभावित किया गया. उन्होंने कहा कि 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों की भूमिका और शक्तियों को लेकर अहम निर्देश दिये थे. राजद नेता ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने दो चुनाव आयुक्तों के अधिकार क्षेत्र को सीमित करने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों को देखते हुए दोनों राज्यों में दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जहां भी अन्याय होगा, राजद उसके खिलाफ आवाज उठाता रहेगा. श्री यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना जरूरी है. इस मौके पर राजद नेता शक्ति सिंह यादव और इजाज अहमद भी मौजूद थे.