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डिजिटल उर्वरक बिक्री प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही: विजय कुमार सिन्हा
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डिजिटल उर्वरक बिक्री प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही: विजय कुमार सिन्हा

Awaz E Bihar•31 अगस्त 2026 को 06:17 pm बजे•27 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक समय पर एवं आसानी से उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है

पटना, 31 अगस्त: (एबीएन) कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कृषि भवन, मीठापुर में "खेत बचाएं, आसानी से गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध कराएं" विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक समय पर एवं आसानी से उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उर्वरक उपलब्धता, आपूर्ति एवं बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
कृषि मंत्री ने कहा कि उर्वरक बिक्री प्रणाली को डिजिटल और किसान केंद्रित बनाने के लिए विभाग ने एफएसएएस (उर्वरक बिक्री एप्लीकेशन सिस्टम फ्रेमवर्क) के माध्यम से एक ऑनलाइन प्रणाली विकसित की है। आईएफएमएस और एग्रीस्टेक के एकीकरण से उर्वरकों की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिन किसानों की भूमि की जानकारी किसान रजिस्ट्री में उपलब्ध है, उनका आवश्यक विवरण किसान आईडी कार्ड के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। अन्य किसान भी एफएसएएस में पंजीकरण कराकर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए संबंधित खेत खाता और खसरा नंबर, क्षेत्रफल और फसल का विवरण देना होगा। उपलब्ध जानकारी के आधार पर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की सिफारिशों के अनुसार उर्वरक की आवश्यकता की गणना की जाएगी और किसान को क्यूआर कोड प्रदान किया जाएगा। यह क्यूआर कोड तीन दिन तक वैध रहेगा। इसके माध्यम से किसान कोड में सूचीबद्ध अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान कर उर्वरक खरीद सकेंगे।
श्री सिन्हा ने कहा कि इस सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट वैशाली और शेखपुरा जिले में शुरू किया गया है. इसके बाद इसका विस्तार अन्य जिलों तक किया गया. डिजिटल उर्वरक बिक्री प्रणाली 1 सितंबर से 19 जिलों में और 2 अक्टूबर से पूरे बिहार में लागू की जाएगी। इससे उर्वरक उपलब्धता, भंडारण, वितरण और बिक्री की बेहतर निगरानी हो सकेगी।
उन्होंने अधिकारियों को सभी उर्वरक विक्रेताओं को नई प्रणाली में प्रशिक्षित करने और किसानों को किसान आईडी कार्ड, एफएसएएस पंजीकरण और उचित प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया।
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