पुलिस हिरासत में अत्याचार, जवाबदेही तय करने की जरूरत!
Awaz E Bihar••28 व्यूज़•5 मिनट पढ़ें
तामिलनाडु के मदुराई की एक अदालत ने व्यापारी पी जे राज और उनके बेटे जे बैंक्स की हिरासत में हुई मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। जे राज और उनके बेटे जे बैंक्स की मौत थूथुकुडी जिले में छह साल पहले हुई थी, जिसके बाद देश भर में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। जिन 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई है, उनमें इंस्पेक्टर सरीदर, सब इंस्पेक्टर अन बाला कृष्णन और रघुगनेश के अलावा अन्य पुलिसकर्मी मुरुगन, समदुराई, मथुराजा, चेल्लादुराई, थॉमस फ्रांसिस और वेलु मुथुमु की पहचान की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अधिकारों के दुरुपयोग का मामला है, तामिलनाडु में कई ईमानदार पुलिसकर्मी हैं और अदालत के इस फैसले से पुलिसकर्मियों में किसी तरह का डर नहीं पैदा होगा। अदालत ने कहा कि इस मामले में पिता और बेटे को निर्वस्त्र किया गया था और उनकी बेरहमी से पिटाई की गई थी, इसके स्पष्ट संकेत मिले हैं, सीबीआई ने इस मामले की जांच की थी और इस मामले को अत्यधिक शानदार और दुर्लभ घटना बताते हुए आरोपियों को मौत की सजा या किसी संभावित पैरोल के बिना उम्रकैद की सजा सुनाने का अनुरोध किया था। अपील की दलील यह थी कि इस अपराध की प्रकृति अत्यधिक गंभीर है और इस मामले में तीन सीधे गवाहों के बयान भी लिए गए हैं, जिससे समाज का विवेक व्यथित हो गया था। मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को स्पष्ट करते हुए सीबीआई का कहना था कि पीड़ितों को हथियारों के साथ बेरहमी से पीटा गया था और अत्यधिक कठोर सजा दी गई थी। पिता और बेटे की हिरासत में मौत की घटना 19 जून 2020 को हुई थी, विवरण के अनुसार जे राज और बैंक्स एक मोबाइल शॉप चलाते थे, उन दोनों को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान निर्धारित समय से अधिक समय तक दुकान खोली थी। हालांकि, यह आरोप बाद में झूठा साबित हुआ था। उन दोनों को सातनकुलम पुलिस स्टेशन ले जाकर बाद में न्यायिक हिरासत में दे दिया गया था, इसके कुछ दिनों के बाद ही दोनों की मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि उन दोनों को पुलिस स्टेशन में रात भर बेरहमी से पीटा गया था और वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उन्हें गंभीर शारीरिक यातनाएं दी गई थीं। सीबीआई ने मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच शुरू की थी और 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर सभी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान एक महिला कांस्टेबल ने बयान देते हुए कहा था कि उन दोनों पिता-पुत्र को रात भर पीटा गया था, जिसके कारण टेबलों और लाठियों पर खून के निशान थे। जांच में साक्ष्य इकट्ठा करने में सीबीआई को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था, इस मामले की जांच में कुल 100 गवाहों के बयान लिए गए थे और पांच साल तक सुनवाई के बाद हाल ही में इन पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई थी। 2021 में कोच्चि में कानून के एक छात्र की आत्महत्या के बाद दहेज के लिए परेशान करने और एक पुलिस अधिकारी के लापरवाही के बाद केरल हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर गलती करने वाले अधिकारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होती है तो पूरी फोर्स लाइन में आ जाएगी। जस्टिस दिवाकर रामचंद्रन ने कोल्लम में एक युवक द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा था, जिसमें पुलिस ने शिकायत के लिए स्टेशन पर परेशान करने और हथकड़ी लगाने का आरोप लगाया था। अदालत ने पुलिस परेशान करने से संबंधित शिकायतों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने कहा था कि जब तक पुलिस अधिकारी यह महसूस नहीं करते कि वे अपने कार्यों के लिए जवाबदेह हैं, तब तक राज्य में कुछ नहीं बदलेगा, वे सभी जानते हैं कि उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई शुरू होने में वर्षों लगेंगे, इसलिए पुलिस वाले इस तरह का व्यवहार करते हैं। अदालत ने राज्य को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि नौजवान को हथकड़ी लगाने और थाने के गेट पर रखने वाले अधिकारी के खिलाफ अपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की गई? अदालत ने यह भी कहा था कि पुलिस स्टेशन एक सार्वजनिक कार्यालय है, आतंकवाद का मैदान नहीं, वे जनता के रक्षक हैं, उन्हें सताने वाले दुश्मन नहीं हैं। किसी भी पुरुष, महिला या बच्चे को पुलिस स्टेशन जाने के लिए स्वतंत्र और आत्मविश्वासी होना चाहिए, जनता इसके लिए किसी तरह के डर में नहीं होनी चाहिए, इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि पुलिस को कैसे और क्यों विश्वास है कि वे जो चाहें कर सकते हैं और इससे बच सकते हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। अगर राज्य किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई करता है तो केवल यही काफी है, इसके परिणामस्वरूप पूरी फोर्स अपना रवैया बदल ल