बिहार में बाढ़ का खतरा, 13 जिलों में मंत्रियों और सचिवों को निगरानी की जिम्मेदारी
Awaz E Bihar••44 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
पटना. बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रशासनिक निगरानी कड़ी कर दी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित 13 जिलों में मंत्रियों और सचिवों को विशेष निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है. उन्हें प्रभावित इलाकों में रहकर स्थिति का आकलन करने, जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है. मुख्यमंत्री ने गुरुवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया. हवाई सर्वेक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न इलाकों में बाढ़ की स्थिति और पानी के फैलाव को देखा. भागलपुर पहुंचकर उन्होंने जमीनी स्तर पर चल रहे राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की. अधिकारियों से प्रभावित इलाकों, राहत गतिविधियों और बचाव तैयारियों के बारे में जानकारी ली. इस बीच, गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करने के बाद पटना में हाई अलर्ट जारी है. जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. गांधी घाट पर भी महज चार घंटे में गंगा के जलस्तर में 10 सेमी की वृद्धि दर्ज की गयी. जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए नदी तट और निचले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है. प्रशासन को संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव संसाधन तैयार रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी जिलों के डीएम और एसपी को भी अलर्ट कर दिया गया है. जिला अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में जल स्तर, संवेदनशील स्थानों और निचले इलाकों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जाए और स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रभावित जिलों में तैनात मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जमीनी स्तर पर स्थिति पर नजर रखें और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए. सरकार की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत, सुरक्षित स्थानों पर लोगों को पहुंचाना और प्रभावी बचाव उपाय करना है।