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समुद्र से आसमान तक भारत आत्मनिर्भर बन रहा है : मोदी
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समुद्र से आसमान तक भारत आत्मनिर्भर बन रहा है : मोदी

Awaz E Bihar•28 जून 2026 को 04:55 pm बजे•14 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत समुद्र से लेकर आसमान तक रक्षा क्षेत्र में तेजी से अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन रहा है और स्थानीय प्रौद्योगिकी और निर्माण के बल पर देश नई ऊंचाइयों को छू रहा है। श्री मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 135वीं कड़ी में कहा कि वर्ष 2026 का आधा हिस्सा बीतने वाला है और इन छह माह में देश ने सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन पर हर देशवासी को गर्व है। उन्होंने कहा कि हाल ही में कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के बेड़े में आईएनएस दोनागیری, आईएनएस सुनयोधक और आईएनएस अग्रे को शामिल किया गया। इन युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह से स्थानीय है।

श्री मोदी ने कहा कि जून में ही विमानन क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि मिली है। 'मेक इन इंडिया' के तहत विकसित सी-295 विमान ने अपनी पहली उड़ान पूरी की है और ऐसे 40 विमान भारत में ही बनाए जा रहे हैं। इससे एमएसएमई और एरोस्पेस क्षेत्र को नई ताकत मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि इसी महीने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने स्थानीय रूप से लंबी दूरी की जमीन से मार करने वाली क्रूज मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित की गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि आज भारत समुद्र से लेकर आसमान तक अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन रहा है। श्री मोदी ने कहा, "मैं अक्सर कहता हूं, जो खेलता है, वह खिलता है। आज देश में ऐसे युवाओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, जो खेल भी रहे हैं और खिल भी रहे हैं। पहले की तुलना में अब कहीं अधिक युवा खेलों को करियर के रूप में अपना रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि नागालैंड में एक और अच्छी कोशिश हो रही है। इसका नाम है 'नागालैंड विमेन फुटसल लीग'। नागालैंड की यह विमेन फुटसल लीग हमारी बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा अवसर दे रही है। मैं ऐसे प्रयासों के लिए नागालैंड के लोगों की प्रशंसा करता हूं। ऐसे प्रयास देश के दूसरे हिस्सों को भी प्रेरित करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंधविश्वास हजारों वर्षों से मानव समाज में घर कर गया है। अंधविश्वास में डूबे लोग, फिर बिना तर्क के, बिना सच्चाई जाने, ऐसे फैसले लेने लगते हैं, जिनका बड़ा नुकसान होता है। वहीं समाज में ऐसे लोग भी होते हैं, जो विज्ञान, अनुभव और तर्क के आधार पर इन सिद्धांतों को चुनौती देते हैं।

उन्होंने कहा कि असम में एक पक्षी पाया जाता है। इस पक्षी का नाम है 'हार्गिला'। 'हार्गिला' एक दुर्लभ पक्षी है। यह प्रकृति को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन असम के कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक इसे अशुभ माना जाता था। लोग इसे अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे। कई बार उन पेड़ों को भी काट दिया जाता था, जिन पर हार्गिला के घोंसले बने होते थे। सोचिए, एक ऐसा पक्षी जो पर्यावरण की सफाई में मदद करता है, वही 'हार्गिला' लोगों के डर का शिकार बन गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी दौरान जीवविज्ञानी पूर्णिमा देवी बर्मन ने यह सब देखा। उन्होंने लोगों के मन में बैठे गलत सिद्धांत को बदलने का संकल्प किया। उन्होंने महिलाओं से बात की, उन्होंने लोगों को विज्ञान के आधार पर समझाया, धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुड़ने लगीं। फिर एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर भगाया जाता था, वही गांव की पहचान बनने लगा। हजारों ग्रामीण महिलाएं 'हार्गिला' को बचाने के लिए आगे आईं - आज उन्हें 'हार्गिला आर्मी' के नाम से जाना जाता है। इन महिलाओं ने समाज के साथ संघर्ष भी किया। समाज को समझाने के लिए दिन-रात काम किया और अंधविश्वास को पीछे छोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि मेघालय की पहचान बादलों से है, सुंदर दृश्यों से है। जो मेघालय जाता है, उसे वहां के लोगों का अपनापन का एहसास लंबे समय तक याद रहता है, लेकिन मेघालय की एक और विशेषता है। यह है मेघालय के रूट ब्रिज। इन पुलों की कहानी बहुत दिलचस्प है। यह पुल कुछ दिनों या कुछ वर्षों में नहीं बनते। इन्हें तैयार होने में कई दशक लग जाते हैं। रबड़ के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे दिशा दी जाती है। इन जड़ों को पानी की धाराओं के पार ले जाया जाता है। समय के साथ वे जड़ें एक मजबूत पुल का आकार ले लेती हैं। इन पुलों की एक और विशेषता है। वे जीवित पुल हैं। समय बीतने के साथ वे और मजबूत हो जाते हैं। उनमें मेघालय के लोगों की रचनात्मक क्षमता दिखाई देती है।

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