जमुई को मिलेगी रफ्तार, 149.78 करोड़ रुपये से किऊल-सुकनर नदी पर बनेंगे दो नए पुल
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पटना, 8 अगस्त (एबीएन) बिहार में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास और सुगम यातायात की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सड़क निर्माण विभाग की ओर से जमुई जिले के अत्यंत महत्वपूर्ण खीरा-सोनो सड़क (एनएच-333 ए) पर दो नए आरसीसी पुलों के निर्माण के लिए कुल 14978.41 लाख (लगभग 149.78 करोड़) रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से क्षेत्र के वर्षों पुराने जर्जर यातायात प्रणाली को पूरी तरह बदलकर स्थानीय लोगों और राज्य के आर्थिक परिदृश्य के लिए एक नई आशा की किरण जगी है।
पहली महत्वपूर्ण परियोजना जमुई जिले के भीतर खीरा-सोनो सड़क के 72वें किलोमीटर में एनएच-333 ए पर स्थित नरियाना घाट पर कियूल नदी के पुराने और जर्जर पुल से संबंधित है। यहां 9382.29 लाख रुपये की अनुमानित लागत से (16 x 29.85 मीटर) आकार का एक बड़ा और आधुनिक आरसीसी पुल बनाया जाएगा। वहीं, इसी सड़क के 80वें किलोमीटर में मांगो बंदर के पास सोकनर नदी पर बने पुराने जर्जर पुल की जगह 5596.12 लाख रुपये की लागत से (9 x 29.85 मीटर) आकार का दूसरा पुल बनाया जाएगा।
सड़क निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बताया कि इन दोनों पुलों के निर्माण से खीरा और सोनो ब्लॉक के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों, व्यापारियों और यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि अब तक कियूल और सोकनर नदी पर पुराने और जर्जर पुलों के कारण मानसून और सामान्य दिनों में भी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता था और भारी वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होती थी। नए पुलों के बनने से न केवल यातायात पूरी तरह सुरक्षित और बिना रुकावट हो जाएगा, बल्कि यात्रा के समय और ईंधन की भी भारी बचत होगी।
सचिव पाल ने सूचित किया कि एनएच-333 ए केवल जमुई के लिए ही नहीं, बल्कि बिहार को पड़ोसी राज्य झारखंड से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है। कियूल और सोकनर नदियों पर बनने वाले ये नए पुल जमुई, मुंगेर, लखीसराय और बांका जैसे पड़ोसी जिलों के बीच व्यापार और परिवहन को गति देंगे।
सचिव ने बताया कि एनएच-333 ए पर उपरोक्त दोनों पुलों के निर्माण के बाद आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस और मरीजों का जिला अस्पताल या बड़े मेडिकल सेंटरों तक पहुंचना अत्यंत तेज और आसान होगा। साथ ही स्थानीय किसानों और छोटे व्यापारियों को अपनी उत्पाद (अनाज, सब्जियां, दूध) को निकटतम मंडियों और शहरी बाजारों तक बिना किसी रुकावट के समय पर पहुंचाने में सुविधा मिलेगी और इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि पुलों के निर्माण के दौरान और निर्माण के बाद सुगम परिवहन के कारण क्षेत्र में नए व्यापारिक अवसर और रोजगार के संसाधन उत्पन्न होंगे।