मानव तस्करी के खिलाफ बड़ा एक्शन, 'जीरो टॉलरेंस' की घोषणा
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पटना, ८ अगस्त: (एबीएन) बिहार में बच्चों और कमजोर वर्गों को मानव तस्करी के चंगुल से बचाने के लिए सरकार ने अब जीरो टॉलरेंस का सख्त संदेश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि मानव तस्करों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई के साथ लापता बच्चों की बरामदगी, पीड़ितों का पुनर्वास, उन्हें कौशल और रोजगार से जोड़ना और सम्मान के साथ नई जिंदगी प्रदान करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। सरकार ने 'नया सवेरा ३.०' अभियान के माध्यम से जागरूकता, रोकथाम, बचाव और पुनर्वास कार्यों को और व्यापक करने की घोषणा की है।
पटना के ज्ञान भवन में आयोजित घरेलू विभाग, बिहार के तत्वावधान में आयोजित पूर्वी जोन सम्मेलन 'मिसिंग चिल्ड्रन एंड ह्यूमन ट्रैफिकिंग' का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव तस्करी केवल एक कानूनी अपराध नहीं बल्कि बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के भविष्य पर हमला है। इसके उन्मूलन के लिए पुलिस, प्रशासन, न्यायपालिका, विभिन्न राज्यों और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि तस्करी के खतरे के बड़े कारणों में आर्थिक बदहाली, रोजगार के सीमित अवसर और मजबूरी का पलायन शामिल हैं। इसलिए सरकार एक ओर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है तो दूसरी ओर राज्य में रोजगार, कौशल और औद्योगिक अवसरों को बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि लोग मजबूरी में पलायन न करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में लापता बच्चों के मामलों की वास्तविक समय निगरानी की जा रही है और अब तक १२०० से अधिक लापता बच्चों को बरामद किया जा चुका है। 'सहयोग शिविर' के माध्यम से जनता की शिकायतों के त्वरित निपटारे का प्रयास किया जा रहा है, जहां अब तक ६ लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं और ५.५० लाख से अधिक मामलों का समाधान किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि 'नया सवेरा १.०' और 'नया सवेरा २.०' के बाद अब 'नया सवेरा ३.०' के माध्यम से मानव तस्करी के खिलाफ अभियान को नई गति दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य पीड़ितों को केवल तस्करी के चंगुल से निकालना नहीं बल्कि उन्हें कौशल, रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ नई जिंदगी प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। हाल के दिनों में इस्पात उद्योग से संबंधित विभिन्न समूहों के साथ ५१ हजार करोड़ रुपये से अधिक के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि रोजगार के ऐसे अवसर पैदा हों कि बिहार के लोग 'कर्म भूमि से जन्म भूमि' वापस आने के योग्य माहौल प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल इसे शिक्षा, कौशल, रोजगार और उचित अवसरों से जोड़ने की है। मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई को सफल बनाने के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के समग्र विकास के लिए बाढ़ जैसी दीर्घकालिक समस्याओं का स्थायी समाधान ढूंढना भी आवश्यक है। उत्तरी बिहार में बाढ़ के प्रभावों को कम करने के लिए जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में कई कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में सिंचाई की सुविधाओं को विस्तारित किया जा रहा है, जबकि गंगा, गंडक (नारायणी) और कोसी जैसी बड़ी नदियों के बेहतर जल प्रबंधन और आपसी संबंध के संबंध में भी योजना बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'समृद्ध बिहार' के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने सम्मेलन में भाग लेने वाले विशेषज्ञों, न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि बिहार सरकार लापता बच्चों और मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई, पीड़ितों की बरामदगी और पुनर्वास के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।
सम्मेलन के दौरान मानव तस्करी के हानिकारक प्रभावों, इसकी रोकथाम और आवश्यक कदमों पर एक वीडियो फिल्म भी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस ए. अमनुल्लाह, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद, महाधिवक्ता बिहार एस.डी. संजय, सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित मानक संचालन प्रक्रिया समिति की अध्यक्ष और केंद्र सरकार की अतिरिक्त महाधिवक्ता अर्चना पाठक दुबे, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस मोहित जे. शाह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, पूर्व डीजीपी पी.एम