पटना (एबीएन) बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार को शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद, सदन के निर्धारित कार्य शुरू होने से पहले ही, विपक्ष के हंगामे के कारण दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ सदस्य आलोक मेहता ने पिछले दिनों पटना में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की लाठीचार्ज का मामला सदन में उठाया, जिसके बाद विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और कार्यवाही प्रभावित हो गई। आलोक मेहता ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया है। उनका कहना था कि बिहार से लेकर दिल्ली तक की सरकारें छात्र विरोधी नीतियों पर अमल कर रही हैं। इसके जवाब में लोक जन शक्ति पार्टी (राम विलास) के विधायक राजू तिवारी ने कहा कि पटना में प्रदर्शन के दौरान मीडिया कर्मियों और राजनीतिक नेताओं पर कथित हमले किए गए, जो गुंडागर्दी और तोड़फोड़ की स्पष्ट मिसाल है। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि प्रदर्शन में वास्तविक छात्रों के बजाय समाज विरोधी तत्व शामिल थे। राजू तिवारी ने मांग की कि सदन इन घटनाओं में शामिल लोगों की सर्वसम्मति से निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित करे। इसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सदस्य आलोक मेहता अपनी सीट पर खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। राजद के सदस्यों ने हाथों में प्लेकार्ड उठाए, नारे लगाते हुए सदन के मध्य (वेल) में पहुंच गए। प्लेकार्ड पर सरकार विरोधी नारे लिखे थे। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि छात्रों पर कथित अत्याचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वे नारे लगा रहे थे कि "लाठी और गोली की सरकार नहीं चलेगी।" इसी बीच सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्यों ने भी विपक्ष पर हाल के प्रदर्शन के दौरान हुए हिंसक घटनाओं का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। सरकार के समर्थक सदस्यों का कहना था कि जिस तरह प्रदर्शन के दौरान शरारती और गुंडा तत्वों ने हिंसा की, उससे स्पष्ट होता है कि यह वास्तविक छात्र आंदोलन नहीं था। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने बार-बार सदस्यों से अपील की कि वे अपनी-अपनी सीटों पर वापस जाएं और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करें, लेकिन हंगामा जारी रहा। अध्यक्ष ने सदन में अनुशासन बहाल करने की कोशिश की, लेकिन लगातार शोर-शराबे के कारण कुछ ही मिनटों में विधानसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस बीच बिहार विधानसभा में शुक्रवार को उस समय जोरदार हंगामा हुआ जब राज्य सरकार ने सदन को बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में भूमिहार समुदाय को आधिकारिक तौर पर "भूमिहार ब्राह्मण" के नाम से दर्ज करने का कोई भी प्रावधान या तरीका नहीं है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक जीवेश मिश्रा के ध्यान आकर्षित करने वाले नोटिस का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार में किसी विशेष जाति को "भूमिहार ब्राह्मण" के रूप में दर्ज करने का कोई कानूनी या प्रशासनिक तरीका नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस नाम को आधिकारिक तौर पर शामिल किया जाए। श्री यादव ने कहा कि यदि किसी सरकारी दस्तावेज में मौजूदा कानूनों के विरुद्ध "भूमिहार-ब्राह्मण" शब्द का उपयोग किया गया है, तो उसे निर्धारित नियमों के अनुसार सही किया जाएगा। मंत्री महोदय के इस जवाब पर भूमिहार समुदाय से संबंधित भाजपा विधायकों ने जोरदार विरोध जताया और सरकार पर उनकी जाति की ऐतिहासिक पहचान को नकारने का आरोप लगाया। बिहार विधानसभा में यह विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा विधायक जीवेश कुमार मिश्रा ने नोटिस के माध्यम से सवाल उठाया कि सरकारी रिकॉर्ड में भूमिहार जाति का उल्लेख केवल "भूमिहार" के रूप में क्यों किया जाता है।