नए शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी 'रेपिस्टों का रक्षक'
Awaz E Bihar••23 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी की नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें बलात्कारियों का रक्षक बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों के विरोध के बाद ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी देना आश्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है।
संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश भर में छात्रों ने शिक्षा प्रणाली और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ विरोध किया, कई छात्राओं पर लाठीचार्ज किया गया, लेकिन सरकार ने युवाओं की चिंताओं को दूर करने के बजाय ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया जो बलात्कारियों का बचाव करता है।
राहुल गांधी ने कहा, "इसके अलावा और क्या घटिया बात हो सकती है कि कोई व्यक्ति बलात्कारियों को सुरक्षा प्रदान करने की बात करे। आज भारत के शिक्षा मंत्री ऐसे ही व्यक्ति हैं। प्रधानमंत्री की कैबिनेट में कई लोग मौजूद थे, वे किसी और को यह जिम्मेदारी दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसे व्यक्ति का चयन किया जो बलात्कारियों का बचाव करता है। यह वास्तव में आश्चर्यजनक है।"
कांग्रेस नेता का यह बयान प्रहलाद जोशी के 2022 के उस रुख के संदर्भ में आया है जो उन्होंने बल्किस बानो सामूहिक बलात्कार मामले के 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई के बाद अपनाया था। उस समय प्रहलाद जोशी ने कहा था कि दोषियों की रिहाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हुई है और कानून के तहत सजा की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद रिहाई की गुंजाइश होती है।
बल्किस बानो मामले के दोषियों की रिहाई पर देश भर में तीव्र जन और राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द करते हुए कहा था कि दोषियों की रिहाई अधिकारों के दुरुपयोग के आधार पर की गई थी। यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है।
उनकी नियुक्ति तब हुई जब धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्रालय से इस्तीफा दिया। प्रधान के इस्तीफे से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक के मामलों, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर छात्रों ने लगातार विरोध किया था। सरकार और छात्र नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत के बाद विरोध समाप्त हो गया, हालांकि विपक्ष अभी भी सरकार पर युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने में विफलता का आरोप लगा रही है।