मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार (30 मार्च) को राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जदयू नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं, इसलिए इस्तीफा आवश्यक था। नीतीश कुमार की ओर से जदयू एमएलसी संजय गांधी ने बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष को इस्तीफा सौंप दिया है। नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में सत्ता परिवर्तन की संभावना है। हालांकि उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के संबंध में कोई खबर सामने नहीं आई है। नीतीश कुमार 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य थे, वे इस महीने 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे। जदयू के मुखिया उन नेताओं में शामिल हैं जो चारों सदनों के सदस्य बने हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने के दौरान कहा था कि उनकी इच्छा थी कि वे राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने जाएं, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। यह स्पष्ट है कि नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के लिए चुने गए और 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य थे। अब पहली बार वे राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार आगामी 10 अप्रैल को वे राज्यसभा की सदस्यता हासिल करेंगे। यह उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार केंद्र में रेल मंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं, उन्होंने अपने कार्यकाल में रेलवे में व्यापक सुधार किए। 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने 'सुशासन बाबू' के रूप में अपनी पहचान बनाई, कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं जिनका उल्लेख पूरे देश में हुआ। शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण जैसे फैसले नीतीश कुमार ने लिए। श्री चौधरी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जब कोई नेता राज्यसभा के लिए चुना जाता है तो एक निर्धारित अवधि के भीतर उसे विधानसभा या विधान परिषद की अपनी मौजूदा सदस्यता से इस्तीफा देना होता है। उन्होंने कहा कि यह एक संवैधानिक आवश्यकता है और मुख्यमंत्री इस जिम्मेदारी को पूरा कर रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री ने श्री कुमार के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने से संबंधित प्रश्न के उत्तर में कहा कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे से संबंधित कोई भी कदम पूरी तरह से संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही उठाया जाएगा।