विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित
Awaz E Bihar••21 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
राज्यसभा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य जॉन ब्रिटास ने सत्तारूढ़ दल की एक महिला सदस्य पर उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का उपयोग करने का आरोप लगाया, जिसके बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई और सदन की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सदन में विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण मानसून सत्र के दौरान अब तक एक भी दिन शून्य और प्रश्नकाल की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल पाई है। इस सत्र का यह आखिरी सप्ताह है और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सत्र का आखिरी दिन कल यानी गुरुवार को है। सदन में अब तक अधिकांश कार्यवाही विपक्ष के हंगामे या वॉकआउट के बीच ही हुई है। सभापति सी पी राधाकृष्णन ने विधायी कार्य से संबंधित दस्तावेज सदन की मेज पर रखे जाने के बाद जैसे ही कार्यवाही शुरू की, विपक्ष के सदस्य अपनी सीटों से उठकर ऊंची आवाज में बोलने लगे। श्री राधाकृष्णन ने श्री ब्रिटास को अपनी बात रखने का मौका दिया। श्री ब्रिटास ने आरोप लगाया कि जब वे सदन में अपनी बात रख रहे थे तो सत्तारूढ़ दल की एक महिला सदस्य उनके पास आकर व्यवधान डालने की कोशिश करने लगीं और उन्हें बार-बार 'लुंगी वाला' कह रही थीं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य ने कहा कि हम सभी भारतीय हैं और मुझे भारतीय और दक्षिण भारत से संबंधित होने, मलयालम भाषा बोलने और अपने परिधान पर गर्व है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता हमारे देश की पहचान है। उन्होंने कहा कि सदस्य का यह व्यवहार सदन और उनकी अवमानना है। संसदीय कार्य मंत्री कर्ण रजجو ने कहा कि इस सदन में सभी सदस्य बराबर हैं और सभी भारतीय हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सदस्य ने कोई अपमानजनक व्यवहार किया है तो सभापति संबंधित सदस्य को अपने कक्ष में बुलाकर उनसे बात करें और इस मामले का समाधान करें। सभापति ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और वे सभी सदस्यों से अपील करते हैं कि वे किसी साथी सदस्य के साथ अपमानजनक व्यवहार न करें। सदस्यों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके शब्दों से दूसरे सदस्यों की भावनाएं आहत न हों। उन्होंने संबंधित सदस्यों से अपने कक्ष में आकर बात करने के लिए भी कहा। सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि जब श्री ब्रिटास को अपनी बात रखने का मौका दिया गया है तो जिस सदस्य सुषमा देव पर आरोप लगाया गया है, वे भी अपना पक्ष रखना चाहती हैं और उन्हें भी सदन में अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए। इस दौरान दोनों पक्षों के सदस्य एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे और सत्तारूढ़ दल की महिला सदस्यों ने एकजुट होकर विपक्ष के सदस्यों की बातों का विरोध किया। सभापति ने दोनों पक्षों के सदस्यों से शांत रहने की अपील की, लेकिन जब इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा तो उन्होंने सदन की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित कर दी। खारगे ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति का मुद्दा उठाना चाहा, जब उनके नाम से संबंधित सहकारिता क्षेत्र का विधेयक पेश किया जा रहा था। इस पर नड्डा ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता सदन को गुमराह कर रहे हैं और विपक्ष चर्चा से दूरी बनाना चाहता है। दोपहर 2 बजे के सत्र में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा और इसके पारित होने के प्रस्ताव को पेश करने के लिए सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल के खड़े होते ही कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। उपसभापति हरिवंश ने संसदीय कार्य मंत्री कर्ण रज्जू की मांग का हवाला देते हुए केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक 2026 से पहले इस सहकारिता से संबंधित विधेयक पर चर्चा की अनुमति दी थी। चर्चा के लिए तृणमूल कांग्रेस की सदस्य ममता ठाकुर का नाम पुकारा गया, लेकिन उन्होंने विधेयक पर बोलने के बजाय दिल्ली में युवा प्रदर्शनकारियों के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्टीकरण की मांग की। उपसभापति ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद भाजपा सदस्य राम राव सुखाराम वडकुटे के भाषण के दौरान खडगे खड़े हो गए। उपसभापति ने विपक्ष के नेता का सम्मान करते हुए उन्हें बोलने की अनुमति दी। खडगे ने सदन में अमित शाह की लगातार अनुपस्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा, ''जिसके नाम से प्रस्ताव है, उन्हें इसे पेश करने के लिए बुलाया जाए।'' हरिवंश ने उनकी बात को खारिज करते हुए सदन के नेता जे पी नड्डा को बोलने का मौका दिया। श्री नड्डा ने कहा, ''वे सदन को गुमराह कर रहे हैं। आप सदन में चर्चा से दूरी बनाना चाहते हैं।'' इस तीखी नोक-झोंक के बाद कांग्रेस के परमोद तिवारी ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद कांग्रेस और उसकी सहयोगी दलों के सदस