पटना : (एबीएन) जनगणना केवल आंकड़े इकट्ठा करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था और प्रशासन के लिए नीति निर्धारण का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। सटीक और अद्यतन आंकड़ों के आधार पर ही सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से संबंधित परियोजनाओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कर सकती है। जनगणना कार्य को सुचारू रूप से और कुशलता के साथ चलाने के उद्देश्य से पूरे बिहार में यह अभियान चलाया जा रहा है। यह बातें जनगणना ऑपरेशन बिहार की निदेशक रंजीता ने पहले चरण के तहत 'स्व-गणना' पहल की प्रगति के साथ-साथ भविष्य की तैयारियों के बारे में विस्तार से बताया।
बिहार के लोगों की सक्रिय भागीदारी पर आभार व्यक्त करते हुए निदेशक ने कहा कि स्व-गणना प्रक्रिया में जनसहयोग राज्य के लिए राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य में उत्कृष्ट योगदान करने के लिए एक प्रेरणा का काम करता है। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय तक बिहार के निवासियों ने सफलतापूर्वक लगभग 47 लाख (4,682,284) स्व-गणना पूरी कर ली है। निदेशक ने मीडिया को आगे बताया कि आज से सभी गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक अपने संबंधित हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स का दौरा करेंगे ताकि सीएमएमईएस पोर्टल पर स्थापित की गई डिजिटल सीमाओं की शारीरिक रूप से पुष्टि की जा सके। यदि किसी भी विरोधाभास या त्रुटि का पता चलता है, तो चार्ज ऑफिसर संबंधित पर्यवेक्षक के माध्यम से उनकी सुधार करेगा। इसके बाद, सभी घरों को श्रृंखला संख्याएं सौंपी जाएंगी। इसके बाद प्रत्येक घर से संबंधित जानकारी, जिसमें संपत्ति और सुविधाओं से संबंधित विवरण शामिल हैं, मोबाइल ऐप के माध्यम से रिकॉर्ड की जाएंगी। इसके अलावा, उन परिवारों के लिए पुष्टिकरण जांच की जाएगी जिन्होंने पहले ही स्व-गणना प्रक्रिया पूरी कर ली है, अपने संग्रह के दौरान तैयार किए गए विशिष्ट आईडी का उपयोग करते हुए।
उन्होंने बताया कि निदेशालय के अधिकारियों को स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय के लिए सभी जिलों में तैनात किया गया है, जिससे अभियानों की निगरानी और तकनीकी सहायता प्रदान करने में आसानी होगी। डेटा गुणवत्ता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए समय-समय पर निरीक्षण करने के भी प्रबंध किए गए हैं। निदेशक ने राज्य के सभी निवासियों से अपील की कि वे जनगणना कर्मियों के साथ पूरा सहयोग करें और सटीक और सच्ची जानकारी प्रदान करें। आगे यह स्पष्ट किया गया कि जनगणना के दौरान एकत्र की जाने वाली सभी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के प्रावधानों के तहत सख्ती से गोपनीय रहती है और इसका उपयोग विशेष रूप से सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है। नागरिकों को संभावित साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ सावधान रहने की भी सलाह दी गई।
यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि जनगणना अधिकारी, किसी भी स्थिति में ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, आधार नंबर, पैन की जानकारी, या वित्तीय भुगतान के किसी भी रूप जैसी जानकारी की मांग नहीं करते हैं। किसी भी प्रश्न, शिकायत या अधिक जानकारी के लिए नागरिक नामित टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1855 पर संपर्क कर सकते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस सूचना ब्यूरो, पटना के उप निदेशक लोकेश प्रकाश और जनगणना ऑपरेशन के निदेशालय के उप निदेशक संजीव कुमार साव भी मौजूद थे।