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बिहार के शैक्षिक प्रणाली में बड़ा बदलाव की तैयारी
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बिहार के शैक्षिक प्रणाली में बड़ा बदलाव की तैयारी

Awaz E Bihar•9 अगस्त 2026 को 05:54 pm बजे•82 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

पटना, 9 अगस्त : (एबीएन) बिहार में शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने शिक्षा को मानकीकृत, आधुनिक, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए कई बड़े फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि सरकार ऐसा शैक्षिक माहौल तैयार करना चाहती है जहां बिहार के बच्चों को मानकीकृत शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अन्य राज्यों का रुख नहीं करना पड़े।

कॉन्वेंशन बिल्डिंग में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय वर्कशॉप और 'चिंतन शिविर' के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय शैक्षिक सुधार समिति और परीक्षा सुधार समिति के गठन सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हर स्कूल को एक उत्कृष्ट शैक्षिक केंद्र बनाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो स्कूलों में शिक्षा के मानक, छात्रों के सीखने के स्तर और शैक्षिक प्रणाली में मौजूद खामियों का जायजा लेकर सुधार के लिए एक्शन प्लान तैयार करेगी।

बिहार के परीक्षा प्रणाली में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। परीक्षाओं को सुगम, पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के लिए गठित परीक्षा सुधार समिति बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ कक्षा स्तर पर होने वाली मूल्यांकन का भी जायजा लेगी। समिति यह सिफारिश करेगी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए छात्रों की केवल रटने की क्षमता नहीं, बल्कि उनके ज्ञान, समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता और वास्तविक शैक्षिक क्षमता का बेहतर तरीके से आकलन कैसे किया जाए। इस कदम से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवा पीढ़ी की आवाज सुनना चाहती है। इसके लिए मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों से मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे। छात्रों से प्राप्त सुझावों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जबकि मुख्यमंत्री स्तर पर हर महीने 'सहयोग शिविर' आयोजित किया जाएगा। इसमें छात्रों की समस्याओं का जायजा लेकर उनके समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का भविष्य यहां के युवा हैं और आने वाली पीढ़ी ही राज्य के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि संसाधनों से वंचित परिवारों के बच्चों को भी वही शैक्षिक अवसर प्रदान किए जाएं जो आर्थिक रूप से स्थिर परिवार अपने बच्चों को देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार से बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अन्य राज्यों का रुख करते हैं। विशेष रूप से कोटा जाने वाले छात्रों की बड़ी संख्या इस बात का संकेत देती है कि बिहार में ही ऐसा मजबूत शैक्षिक ढांचा तैयार करने की आवश्यकता है, जहां छात्रों को मानकीकृत शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी मिल सके।

मुख्यमंत्री ने छात्र क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत लगभग 18 हजार करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन इस राशि का एक बड़ा हिस्सा अन्य राज्यों में जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि बिहार में ही बेहतर शैक्षिक संस्थान और सुविधाएं उपलब्ध हों तो छात्रों को बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी और राज्य की राशि भी राज्य में ही रहेगी।

राज्य में मानकीकृत स्कूलों की स्थापना पर भी सरकार ने जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक 551 मॉडल स्कूल बनाए जा चुके हैं और सरकार ने इस संख्या को बढ़ाकर 1001 मॉडल स्कूल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि मॉडल स्कूलों के माध्यम से छात्रों को बेहतर शैक्षिक माहौल, आधुनिक सुविधाएं और मानकीकृत शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि 15 अगस्त से ऐसा प्रणाली शुरू किया जाएगा जिसके तहत बच्चे रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों से छात्रों को शिक्षा के अधिक अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग प्रौद्योगिकी का युग है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लाभ उठाकर शैक्षिक प्रणाली को अधिक प्रभावी, आधुनिक और छात्रों की आवश्यकता के अनुसार बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी बच्चों को कंप्यूटर और अंग्रेजी की शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उर्दू, संस्कृत और बिहार की पांच भाषाओं के प्रचार पर भी ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार की संस्कृति, सभ्यता और गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी युवाओं की है।

शैक्षिक प्रणाल
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