विभाजन की विभीषिकाओं को याद रखना जरूरी, राष्ट्र रहेगा, तभी हम रहेंगे: मुख्यमंत्री
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पटना, 14 अगस्त (एबीएन) विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आज कॉन्वेंशन हॉल में एक श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री सुमित कुमार चौधरी ने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की और विभाजन की विभीषिका का शिकार होने वाले पीड़ितों और विस्थापित परिवारों से संवेदना व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान दो मिनट का मौन रखा गया। विभाजन पर आधारित एक वृत्तचित्र फिल्म भी दिखाई गई। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन मानवता की सबसे बड़ी त्रासदी थी। विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा और अपूरणीय क्षति और पीड़ा का सामना करना पड़ा। यह दिन उन सभी लोगों की कुर्बानियों और संघर्षों को याद करने का अवसर है जिन्होंने कठिन समय में अपनी जान दी और असहयोगी परिस्थितियों का सामना किया। 79 वर्ष पूर्व का वह दृश्य कितना दर्दनाक होगा जब देश विभाजित हो रहा था और लोग अलग हो रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने वर्ष 2021 से इस दिन को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। विभाजन की विभीषिकाओं को याद करते हुए, केवल अतीत को याद करना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इतिहास की सच्चाई से परिचित कराना है। आवश्यकता इस बात की है कि युवाओं और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के संघर्ष, कुर्बानियों और घटनाओं से परिचित कराया जाए ताकि वे इतिहास से सबक सीखकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय लोगों की बड़ी संख्या ने अपने घर, संपत्ति और संपत्ति छोड़कर नई जगहों पर जीवन शुरू किया। कठिन परिस्थितियों में समाज के विभिन्न वर्गों ने एक दूसरे की मदद की और पीड़ितों और विस्थापित व्यक्तियों की मदद की। यह मानवता और सहयोग की भावना हमारे सामाजिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरदार वल्लभभाई पटेल ने 567 रियासतों को एकजुट किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने चंपारण से सत्याग्रह शुरू किया और देश को स्वतंत्रता दिलाई। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एकजुट भारत का संकल्प लिया। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, लोक नायक जेपी नारायण जी ने लोकतंत्र को मजबूत किया। हमारी सभ्यता और संस्कृति शानदार है। विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास हमें सिखाता है कि समाज में भाईचारा, सौहार्द और एकता जितनी मजबूत होगी, राष्ट्र उतना ही मजबूत होगा। जब राष्ट्र होगा तभी हम सब जीवित रहेंगे। राष्ट्र की भावना सबसे पहले होनी चाहिए। हमें अतीत के दर्द से सबक सीखकर ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए सामाजिक एकता और परस्पर विश्वास को निरंतर मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सौहार्द हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें विभाजन की विभीषिका को याद रखना चाहिए और राष्ट्र की एकता और अखंडता को पहली प्राथमिकता देनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की विभीषिका में अपनी जान गंवाने वालों और उन परिवारों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम एकजुट होकर देश और समाज को मजबूत बनाएं। आज हम उन सभी वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने हमें स्वतंत्रता दिलाई। हम अपने पूर्वजों को भी नमन और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने विभाजन की विभीषिका में अपनी जान गंवाई। कार्यक्रम से विधायक श्री संजीव चौरसिया और कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव श्री प्रणव कुमार ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक श्री रत्नेश कुशवाहा, विधान परिषद के सदस्य श्री अनिल शर्मा, विधान परिषद के सदस्य श्री अरविंद शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, डीजीपी श्री विनय कुमार, योजना एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉक्टर एन विजय लक्ष्मी, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉक्टर चंद्रशेखर, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री सुहेल, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के सचिव श्री नवीन कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम के बाद 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर कॉन्वेंशन हॉल से विधानसभा परिसर में स्थित पीपल के पेड़ के बाग तक एक मोमबत्ती मार्च का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री सुमित कुमार चौधरी ने भाग लिया।