विधायी संस्थानों में महिलाओं को आरक्षण 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय: मोदी
Awaz E Bihar••24 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण प्रदान करने संबंधी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के पारित होने को 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह से नारी शक्ति के लिए समर्पित है। प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश की संसद एक नई इतिहास रचने के करीब है जो अतीत के सिद्धांतों और भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में पेश किए जाने वाले इस संशोधन विधेयक से पहले सोमवार को यहां विज्ञान भवन में 'नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम' से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक करने जा रहा है, एक ऐसा निर्णय जो नारी शक्ति के लिए समर्पित है। उन्होंने इस पल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सामाजिक न्याय के महत्व पर जोर देते हुए देश एक ऐसे समान भारत का सपना देखता है जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा नहीं बल्कि काम करने के संस्कृति का अनिवार्य हिस्सा हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक, दशकों का इंतजार अब समाप्त होने वाला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में नई संसद भवन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और सभी दलों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को समय पर लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र मजबूत हो। इसके लिए संसद के बजट सत्र का विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास और प्राथमिकता यह है कि यह काम चर्चा, सहयोग और भागीदारी के माध्यम से पूरा किया जाए, जिससे संसद का गरिमा बढ़ेगा।
इस मुद्दे पर महिलाओं में पाए जाने वाले देशव्यापी जोश और उत्साह की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश भर की महिलाएं विधानसभाओं और लोकसभा तक पहुंचने की अपनी इच्छाओं का इज़हार कर रही हैं। उनके सपनों को नई उड़ान मिली है और देश में एक सकारात्मक माहौल बना है। प्रधानमंत्री ने सभी महिलाओं से इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने और अपने सांसदों के साथ मिलकर अपने विचारों और अपेक्षाओं को साझा करने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान सभा तक महिलाओं के योगदान का उल्लेख करते हुए स्वतंत्र भारत की नींव रखने में नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। महिलाओं ने देश के लिए हर क्षेत्र में उत्कृष्ट काम किया है और देश में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक, महिलाएं इतने महत्वपूर्ण पदों पर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, जहां भी महिलाएं रही हैं, उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। श्री मोदी ने पंचायती राज संस्थाओं को महिला नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि राजनीति और सामाजिक जीवन में लाखों महिलाओं की यह सक्रिय भागीदारी विश्व के प्रमुख नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी आश्चर्यचकित करती है और भारत के गौरव में वृद्धि करती है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि स्थानीय निकायों में वर्षों से काम करने वाली लाखों महिलाओं के पास व्यापक अनुभव है और वे बड़े पदों पर काम करने के लिए तैयार और उत्सुक हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन इन सभी महिलाओं के जीवन में एक बड़ा अवसर साबित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि पंचायत से संसद तक का सफर आसान होने वाला है। विकसित भारत की यात्रा में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि उनकी सरकार ने 2014 से महिलाओं के जीवन के हर चरण के लिए योजनाएं बनाई हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हर निर्णय और परियोजना में महिलाओं को सशक्त बनाने को प्राथमिकता दी गई है जिसके परिणामस्वरूप महिलाएं आर्थिक रूप से अधिक मजबूत हुई हैं।
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप क्रांति में महिला नेतृत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पंजीकृत स्टार्टअप्स में से 45 प्रतिशत से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक के रूप में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों पूर्व शुरू किए गए 'स्किल इंडिया मिशन' के परिणाम अब हजारों 'ड्रोन दीदियों' के माध्यम से दिखाई दे रहे हैं, जो तकनीक के माध्यम से आधुनिक कृषि सिखाकर कृषि में क्रांति ला रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि महिलाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित विकास के दृष्टिकोण ने पुरानी सोच को चुनौती दी है और महिलाएं आज उन क्षेत्रों में भी ऊंचाइयों को छू रही हैं जिन्हें कभी पुरुषों का गढ़ माना जाता था। भारतीय बेटियां