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'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल मानसून सत्र में पेश नहीं होगा
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'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल मानसून सत्र में पेश नहीं होगा

Awaz E Bihar•30 जुलाई 2026 को 06:06 pm बजे•48 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान एक बड़ा अपडेट सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से जुड़ा बिल इस सत्र में पेश नहीं किया जाएगा, इसलिए इस पर चर्चा नहीं हो सकेगी. यह भी पता चला है कि विधेयक की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
बता दें कि मानसून सत्र की शुरुआत से ही कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार इस दौरान 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' बिल पेश कर सकती है, लेकिन अब साफ हो गया है कि इससे जुड़ा संविधान संशोधन बिल मौजूदा सत्र में पेश नहीं किया जाएगा. बिल की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का कार्यकाल भी बढ़ा दिया गया है, जिसके बाद समिति शीतकालीन सत्र के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जेपीसी का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद यह भी साफ हो गया है कि समिति मौजूदा मानसून सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपेगी. ऐसे में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' बिल पर अगली कार्रवाई शीतकालीन सत्र में जेपीसी रिपोर्ट पेश होने के बाद ही आगे बढ़ने की संभावना है.
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का मतलब है लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक ही समय पर कराने की व्यवस्था. फिलहाल देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। इसके अलावा कई राज्यों में स्थानीय चुनाव भी अलग-अलग समय पर होते हैं। प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि एक साथ चुनाव कराने से बार-बार लगने वाली आचार संहिता का प्रभाव कम हो जाएगा। साथ ही चुनाव खर्च और प्रशासनिक संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को भी कम किया जा सकेगा. उनका मानना ​​है कि इससे सरकारों को नीति निर्माण और विकास परियोजनाओं पर अधिक समय और ध्यान देने का मौका मिलेगा।
गौरतलब है कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव को लागू करने से पहले कई जटिल सवालों का समाधान होना जरूरी है. उदाहरण के लिए, यदि किसी राज्य सरकार या केंद्र सरकार का कार्यकाल समय से पहले समाप्त हो जाता है, तो चुनाव कैसे निर्धारित किए जाएंगे? क्या नई सरकार को केवल शेष कार्यकाल के लिए ही काम करने की अनुमति दी जाएगी? इसके अलावा लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव, संवैधानिक प्रावधानों में संशोधन और चुनाव आयोग की तैयारियों जैसे अहम मुद्दों पर भी विचार किया जा रहा है. इन्हीं कारणों से इस विधेयक का परीक्षण और विचार बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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