समुद्री हज के अंत और वायुमार्ग की शुरुआत के तीस साल, मुंबई के बंदरगाह खामोश
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समुद्री हज के अंत और वायुमार्ग की शुरुआत के तीस साल, मुंबई के बंदरगाह खामोश

Awaz E Bihar••51 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

आज हज कमिटी ऑफ इंडिया के आयोजन में हज यात्रियों को लेकर अंतिम उड़ान जेद्दा के लिए रवाना हो गई, कल बुधवार को बेंगलुरु से कमिटी और मुंबई से निजी ट्रेवल एजेंसियों की अंतिम फ्लाइट रवाना होगी।
इसके साथ ही मुंबई से हज के लिए ऐतिहासिक समुद्री यात्रा के समापन और पूर्ण हवाई हज प्रणाली के क्रियान्वयन को आज तीस वर्ष पूरे हो गए, लेकिन 1995 में बंद की गई समुद्री हज सेवा की यादें आज भी लाखों भारतीय मुसलमानों की सामूहिक स्मृति में जीवित हैं। यह केवल एक यात्रा प्रणाली का अंत नहीं था, बल्कि गरीब और मध्यम वर्ग के हज यात्रियों के लिए एक अपेक्षाकृत कम लागत और आध्यात्मिक यात्रा का अंत भी था, जिसने भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।
1995 में मुंबई से जेद्दा तक संचालित ऐतिहासिक समुद्री हज सेवा को औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया था, जिसके बाद 1996 से पूर्ण हवाई हज प्रणाली लागू की गई। इस निर्णय के साथ ही मुंबई के बंदरगाहों, हाजी यात्री घरों और हज काफिलों से जुड़ी कई दशक पुरानी आध्यात्मिक परंपराएं भी अतीत का हिस्सा बन गईं।
एक समय था जब मुंबई को केवल व्यावसायिक शहर नहीं बल्कि 'बाब-उल-हज' कहा जाता था। उत्तर प्रदेश, बिहार, कश्मीर, बंगाल, गुजरात, केरल और दक्कन सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हज यात्री मुंबई पहुंचते थे। हज सीजन में बलार्ड पियर, इंद्रा डॉक और येलो गेट के आसपास आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिलता था। बंदरगाहों पर 'लेब्बैक अल्लाहुम लेब्बैक' की आवाजें गूंजती थीं जब कि विदाई के समय हजारों लोग अपने प्रियजनों को दुआओं और आंसू भरी आंखों के साथ अलविदा कहते थे।
समुद्री यात्रा को केवल एक यात्रा साधन नहीं बल्कि आध्यात्मिक प्रशिक्षण का हिस्सा माना जाता था। कई दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में नमाज़ बा जमात, तिलावत-ए-कुरआन, ज़िक्र-ओ-अज़कार और सामूहिक दुआओं का विशेष माहौल बना रहता था। बड़े हज यात्रियों के अनुसार समुद्र की लंबी यात्रा मनुष्य में धैर्य, सहनशीलता और आध्यात्मिक एकाग्रता पैदा करती थी। विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रों और संप्रदायों से संबंधित मुसलमान एक ही जहाज पर इकट्ठे होकर इस्लामी भाईचारे की व्यावहारिक तस्वीर पेश करते थे।
इस ऐतिहासिक परंपरा की सबसे बड़ी निशानी प्रसिद्ध यात्री बेड़े एमवी अकबरी थी, जिसने लगभग दो दशकों तक लाखों भारतीय हज यात्रियों को मुंबई से जेद्दा पहुंचाया था। लेकिन 1995 में जर्जर हालत, बढ़ते खर्च, तकनीकी समस्याओं और सरकारी नीति में बदलाव के कारण इस जहाज को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया, और इसके साथ ही भारत की समुद्री हज परंपरा भी समाप्त हो गई।
उस समय सरकार की ओर से यह रुख अपनाया गया था कि हवाई यात्रा अधिक तेज, आधुनिक और सुरक्षित है, लेकिन जन समूहों और सामाजिक संगठनों का मानना था कि इस निर्णय ने हज को गरीब मुसलमानों की पहुंच से दूर कर दिया। समुद्री यात्रा अपेक्षाकृत कम लागत वाली थी और सीमित संसाधनों वाले व्यक्ति भी वर्षों की मामूली बचत के बाद हज की سعादत प्राप्त कर लेते थे, लेकिन हवाई प्रणाली लागू होने के बाद हज खर्च लगातार बढ़ते गए।
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार आज हज एक ऐसी महंगी यात्रा बनती जा रही है जिसके लिए मध्यम वर्ग भी गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। कई परिवार अपनी जमा पूंजी, आभूषण या ऋण के माध्यम से हज की अदायगी पर मजबूर हैं। ऐसे में समुद्री हज सेवा के बंद होने को गरीब हज यात्रियों के लिए एक बड़ा आर्थिक नुकसान माना जाता है।
समुद्री हज सेवा के बंद होने के विरोध में उस समय मुंबई के बंदरगाह क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन, धरने और जन समूहों के सम्मेलन भी आयोजित किए गए थे। विभिन्न धार्मिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इसे गरीब मुसलमानों के लिए एक बड़ा झटका घोषित किया था।
उस समय न तो ऑनलाइन पंजीकरण था और न ही कंप्यूटरीकृत प्रणाली। प्रतीक्षा सूची में शामिल हज यात्री अंतिम क्षण तक बंदरगाहों के बाहर आशा लगाए बैठे रहते थे कि शायद जहाज में जगह मिल जाए। हाजी यात्री घर और आसपास के क्षेत्र हज सीजन में मानव भीड़ और आध्यात्मिक जोश का दृश्य पेश करते थे।
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों के लिए समुद्री हज यात्रा एक महान परंपरा थी। शुरुआत में मुसलमान बादबानी नावों और जमीनी काफिलों के माध्यम से हज पर जाते थे, बाद में ब्रिटिश काल में नियमित स्टीमर सेवा शुरू हुई, जिसने मुंबई को भारतीय हज यात्रियों का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया।
आज तीन दशकों के बाद मुंबई के शांत बंदरगाह, सुनसान बलार्ड पियर और उजाड़ येलो गेट उस आध्यात्मिक युग की याद दिलाते हैं जब समुद्र की लहरों के स
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