वक्फ सिर्फ जायदाद नहीं बल्कि अल्लाह तआला की अमानत और इस्लामी तहजीब का महत्वपूर्ण स्तंभ: महमूद असाद मदनी
Awaz E Bihar••31 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि वक्फ सिर्फ जायदाद नहीं बल्कि अल्लाह तआला की अमानत और इस्लामी तहजीब का महत्वपूर्ण स्तंभ है, इसलिए इसकी हिफाजत, दस्तावेजों का संरक्षण और जरूरत पड़ने पर कानूनी जद्दोजहद भी इबादत है। यह बात उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में आयोजित ऑल इंडिया मुतवल्ली कॉन्फ्रेंस में मुख्य भाषण देते हुए कही। उन्होंने कहा कि वक्फ को सिर्फ मुतवल्ली का मामला नहीं बल्कि पूरी मिल्लत की साझा जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि जिस कौम ने अपनी अमानतों की हिफाजत छोड़ दी, इतिहास ने भी उसकी हिफाजत छोड़ दी।
मौलाना मदनी ने कहा कि वक्फ के सामने आने वाली चुनौतियों में बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ हमारी अपनी लापरवाही, असंपूर्ण प्रबंधन और दस्तावेजों की सुरक्षा की कमी भी शामिल है। उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के संदर्भ में सरकार से मांग की कि न्याय और संवैधानिक सिद्धांतों को हर हाल में आगे रखा जाए, उन्होंने कहा कि मैं सरकार से यह भी कहना चाहता हूं कि न्याय किसी एक वर्ग पर एहसान नहीं होता, न्याय राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। कानून की इज्जत तभी बनी रहती है जब कानून सब के लिए एक जैसा हो।
मौलाना मदनी ने मुतवल्लियों से अपील की कि वक्फ संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित और डिजिटलाइज्ड किया जाए, वित्तीय पारदर्शिता, नियमित ऑडिट और अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विरासत से बचने पर जोर देते हुए कहा कि इससे संस्थानों का विश्वास और भावना प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में वक्फ की हिफाजत के लिए अंशकालिक नहीं बल्कि पूर्णकालिक जद्दोजहद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर हम ईमानदारी, योजना और निरंतर मेहनत के साथ इस क्षेत्र में काम करें, जिम्मेदार व्यक्तियों को तैयार करें और मिल्लत को इस मिशन से जोड़ें तो अल्लाह तआला हमारी कोशिशों को कुबूल फरमाएंगे और वक्फ के खिलाफ होने वाली हर साजिश को नाकाम बनाएंगे।
पटना हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस इकबाल अंसारी ने अपने भाषण में कहा कि जहां मुतवल्ली मौजूद हैं, वहां वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण और कानूनी कार्रवाइयों में सबसे ज्यादा मुश्किलें आ रही हैं, इसलिए मुतवल्ली जनों को विशेष रूप से जिम्मेदारी का एहसास करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार और जनता के बीच विवादों में अदालत को संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहते हुए फैसला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में यह कहना मुश्किल है कि अदालत न्याय के अनुसार काम कर रही है।
मध्य जमीयत अहले हदीस हिंद के अमीर मौलाना असगर अली इमाम महदी सلفी ने कहा कि वक्फ की समस्याओं का सारा बोझ सिर्फ मुतवल्लियों या सरकार पर डालने के बजाय पूरी मिल्लत और जनता को अपनी जिम्मेदारी का एहसास करना चाहिए। जमात-ए-इस्लामी हिंद के नायब अमीर मालिक मुतासिम खान ने कहा कि वक्फ के महत्व को उजागर करते हुए उन्हें अधिक प्रभावी और जनहित के लिए उपयोगी बनाना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जों और विवादों की एक बड़ी वजह कुछ मुतवल्लियों की लापरवाही और कुछ स्थानों पर वक्फ संपत्तियों को व्यक्तिगत संपत्ति समझने का रुझान है जिससे वक्फ को भारी नुकसान हुआ है।
अपने अध्यक्षीय भाषण में अध्यक्ष सम्मेलन सैयद शाह मोहम्मद अली अल-हुसैनी साहब (गुलबर्गा) ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान वक्फ की हिफाजत की मुहिमों के परिणामस्वरूप जनता में वक्फ के बारे में उल्लेखनीय जागरूकता पैदा हुई है, जिसे और अधिक संगठित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों की हिफाजत, अवैध कब्जों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई और वक्फ कानूनों से पूरी तरह से वाकिफ होना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है। उन्होंने धनी लोगों से नए वक्फ स्थापित करने की अपील करते हुए कहा कि वक्फ को शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित के प्रसार का एक प्रभावी साधन बनाया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुतवल्ली की मूल जिम्मेदारी वाकिफ के इरादे का पूरा पालन करना है।
शाह सैयद यादुल्लाह हुसैनी नायब सज्जादा निशीन रौजा खुर्द गुलबर्गा शरीफ ने अपने भाषण में वक्फ की हिफाजत के लिए एक प्रभावी और सक्रिय समिति के गठन पर जोर देते हुए कहा कि यह समिति वक्फ संपत्तियों की हिफाजत, निगरानी और कानूनी बचाव के लिए व्यावहारिक योजना तैयार करे। उन्होंने कहा कि वक्फ का प्रभावी संरक्षण तभी संभव है जब जिम्मेदार लोग व्यक्तिगत रुचि, जिम्मेदारी की भावना और निरंतर प्रयास के साथ इस काम को पूरा करें।