विकास में महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं: राधा कृष्णन
Awaz E Bihar••5 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि 'लक्ष्मी दीदी' और 'नमो ड्रोन दीदी' जैसे कदमों के सहयोग से महिलाएं विकास की प्रक्रिया में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। श्री राधाकृष्णन ने आज यहां 18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर देश भर में काम करने वाले सभी प्रशासनिक अधिकारियों और उनके सेवानिवृत्त साथियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने दिल्ली में प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को "भारत का स्तंभ" घोषित किया था, जो 79 साल पहले की बात है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के विभिन्न बैचों ने इस विरासत को लगातार बनाए रखा है और विकास और समृद्धि के मार्ग पर देश के ठोस ढांचे के रूप में काम किया है। उन्होंने विभिन्न राज्यों में काम करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को राष्ट्रीय एकता और एकता का सबसे बड़ा राजदूत बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में हासिल की गई अभूतपूर्व प्रगति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के मार्गदर्शक दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में बताया, जिनमें लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना, गरीबों के लिए 4 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण और सीमा गांवों को गतिशील समुदायों के रूप में विकसित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी दीदी और नमो ड्रोन दीदी जैसे कदमों के सहयोग से महिलाएं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने 'आशांक्षी जिले' कार्यक्रम और 'एक जिला एक उत्पाद' जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया और इस बात पर जोर दिया कि कोई भी राज्य या जिला पीछे नहीं रहना चाहिए। सरकारी नीतियों के वास्तविक कार्यान्वयनकर्ताओं के रूप में प्रशासनिक अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों में उनकी ईमानदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के सिद्धांत का अनुभव प्रत्येक नागरिक को होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के मार्ग में भारत को अभी भी लंबा सफर तय करना है। उन्होंने समग्र विकास और प्रभावी शासन को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता, ईमानदारी और अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को दोहराते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि कोई भी नागरिक पीछे न रहे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक सेवाओं में केवल सामान्य ज्ञान रखने वालों पर निर्भर रहने का समय समाप्त हो गया है और उन्होंने अधिक विशेषज्ञता की मांग की। उन्होंने राज्यों से शासन को मजबूत बनाने के लिए दूरदर्शी भर्ती नीतियां अपनाने की भी अपील की। उन्होंने सिविल सेवकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, नेचरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और ब्लॉकचेन जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उपराष्ट्रपति ने प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि 2016 में महिलाओं का हिस्सा लगभग 21 प्रतिशत था जो 2025 की परीक्षा में बढ़कर लगभग 31 प्रतिशत हो गया है और आज कई महिलाएं वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने इसे 'नारी शक्ति' का ठोस प्रमाण बताया, जो न केवल संख्यात्मक परिवर्तन है बल्कि सोच में भी परिवर्तन है। उन्होंने 'नारी शक्ति वंदन अदीनियम' के माध्यम से विधायी निकायों में भी इसी तरह की प्रगति की उम्मीद जताई।