महिला आरक्षण के नाम पर मोदी मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं: कांग्रेस
Awaz E Bihar••8 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा हमेशा महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ रही है और यही वजह है कि इस बार उसने महिला आरक्षण की आड़ में सीमितीकरण लाने की साजिश रची, जिसकी वजह से संसद में पेश किया गया संविधान संशोधन विधेयक गिर गया और भाजपा को मुंह की खानी पड़ी। पार्टी ने कहा कि भाजपा शुरू से ही महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती है। यह हमेशा महिला आरक्षण के खिलाफ रही है और यही वजह थी कि जब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1990 में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाए थे, तो भाजपा ने इसका विरोध किया था, जिसकी वजह से वह विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डरे हुए हैं, इसलिए उन्होंने देश के नाम शुक्रवार को 29 मिनट के संबोधन में 58 बार, यानी लगभग हर 30 सेकंड में कांग्रेस का नाम लिया। इससे साफ झलकता है कि मोदी महिला आरक्षण की आड़ में सीमितीकरण की अपनी कथित साजिश के नाकाम होने के कारण देश के नाम संबोधन के दौरान मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे। उन्होंने कहा कि मोदी को संविधान संशोधन विधेयक गिरने पर दुखी होने के बजाय 543 लोकसभा सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रबंध करना चाहिए और कांग्रेस इस प्रबंध का पूरी तरह समर्थन करेगी। उनका कहना था कि मौजूदा 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं को दे दी जाएं और इसमें रुकावट न बने। कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि देश में जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होते हैं, वहां मोदी कुछ नहीं बोलते। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के लिए 'कांग्रेस की विधवा जैसे शब्दों का उपयोग कर महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की बात करने वाली भाजपा को यह याद रखना चाहिए कि जब राजीव गांधी के शासनकाल में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया था, तब भाजपा ने इसके खिलाफ वोट दिया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में वृद्धि हुई है। पार्टी के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या 4 लाख से अधिक हो गई है और बलात्कार के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि भाजपा के 1600 से अधिक विधायकों में केवल 167 महिलाएं हैं। देश की कई राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद केवल एक राज्य में ही महिला मुख्यमंत्री है। पार्टी का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि भाजपा महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है और यही वजह है कि उसे संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में संसद में असफलता का सामना करना पड़ा।