सीजीएल-टीडीपीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया
Awaz E Bihar••35 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
रांची, 18 अगस्त: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी, सीजीएल और टीडीपीएल के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने और सीआईडी जांच की घोषणा के बाद इन परीक्षाओं के माध्यम से भर्ती हुए कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। कर्मचारियों ने सोमवार की देर रात तक प्रोजेक्ट भवन परिसर में धरना व प्रदर्शन किया. मंगलवार की सुबह भी बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन पहुंचे और कई घंटे तक धरना देकर सरकार से अपनी नौकरी बचाने की मांग की. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि अगर किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति में अनियमितता पाई जाती है या उसकी ओर से कोई गलती पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन बिना किसी व्यक्तिगत गलती के लगभग दो हजार स्थायी सीजीएल कर्मचारियों की नौकरियों पर सवाल उठाना न्याय की आवश्यकताओं के खिलाफ है। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि करीब दो हजार सीजीएल कर्मचारियों का अपराध क्या है. उनका कहना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में गलती हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्त कर्मचारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, सरकार की ओर से पहले करायी गयी सीआइडी जांच में प्रश्नपत्र लीक की बात सामने नहीं आयी थी. ऐसे में अगर बड़े पैमाने पर अनियमितता या किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी नियुक्त कर्मचारियों पर डालना उचित नहीं होगा. नियुक्त कर्मचारियों ने मांग की कि अगर सरकार उनकी नियुक्तियों को गलत या अवैध मानती है तो कोर्ट में हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट करे कि नियुक्त कर्मचारियों ने क्या अपराध किया है और किस आधार पर उनकी नियुक्ति अवैध है. उन्होंने कहा कि केवल मौखिक आदेश या विरोध के दबाव से किसी कर्मचारी की नौकरी समाप्त नहीं की जा सकती. इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. कर्मचारियों ने कहा कि वे कोर्ट के आदेश और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करेंगे. वे अपनी नियुक्ति पर अदालत के फैसले का पालन करेंगे, लेकिन सरकार के महज मौखिक आदेश के आधार पर पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं। धरना समाप्त कर नियोजित कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन समेत अन्य स्थानों पर अपने काम पर लौट गये. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि नौकरी सुरक्षा पर उनका विरोध और सरकार के साथ बातचीत जारी रहेगी। गौरतलब है कि जेपीएससी-जेएसएससी सिद्ध मंच, देवेन्द्र नाथ महतो गुट समेत विभिन्न छात्र संगठनों के आंदोलन के 24वें दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया के सामने छात्रों की मांगों पर कार्रवाई की घोषणा की थी. उन्होंने जेपीएससी-जेएसएससीसीजीएल और टीडीपीएल के तहत आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने के साथ ही मामले की सीआईडी जांच की मांग की थी. मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद इन परीक्षाओं के जरिये नियुक्त करीब दो हजार युवाओं में अनिश्चितता और गुस्से की स्थिति है. स्थायी कर्मचारियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे वैधानिक रूप से नियोजित हैं. ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना चाहिए. नियुक्त कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि किसी भी कार्रवाई से पहले हर नियुक्त व्यक्ति और अभ्यर्थी के चरित्र की जांच की जाए और जिन कर्मचारियों में कोई गड़बड़ी नहीं पाई जाए उन्हें सुरक्षित रखा जाए.