शिक्षा के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन को दबाने की हर कोशिश विफल होगी: दीपांकर भट्टाचार्य
Awaz E Bihar••44 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
पटना : (एबीएन) शिक्षा में भ्रष्टाचार, पेपर लीक, फीस में वृद्धि, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर कथित हमलों और छात्र आंदोलनों पर कार्रवाई के मुद्दे को लेकर सीपीआई (एमएल) ने रविवार को केंद्र सरकार को आलोचना का निशाना बनाया है। पार्टी के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि शिक्षा के मुद्दे पर देशव्यापी छात्र आंदोलन को दबाने की हर कोशिश विफल होगी और यह आंदोलन लगातार व्यापक होता जा रहा है।
आईएमए हॉल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि शिक्षा का मुद्दा केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह नई पीढ़ी और समाज के विभिन्न वर्गों का साझा मुद्दा बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि बिहार से लेकर दिल्ली तक छात्र, युवा, मजदूर और श्रमिक वर्ग इस संघर्ष के साथ खड़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया वीडियो बयान पर भी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि छात्रों को माफी देने की बात की आड़ में रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक 15 वर्षीय छात्रा तक को संगठित तरीके से निशाना बनाया गया। उनके अनुसार नई पीढ़ी के साथ खड़े होना लोकतंत्र और शिक्षा प्रणाली के संरक्षण का मुद्दा है।
दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का उल्लेख करते हुए दीपांकर भट्टाचार्य ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के बाद अब गृह मंत्री की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही आरोप लगाया कि मामलों को वापस लेने के एलान के बावजूद आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को वापस नहीं लिया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सीपीआई (एमएल) के विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि देशभर के छात्रों और युवाओं में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ गहरा गुस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन, विशेष रूप से छात्राओं को निशाना बनाकर इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही बिहार की विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करने और फीस में वृद्धि के माध्यम से गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर करने का आरोप लगाया।
आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष धनंजय, सचिव दीपांकर मिश्रा और उपाध्यक्ष सबा अफरीन ने कहा कि संगठन बिहार में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने स्नातक में 7.5 सीजीपीए की शर्त हटाने, पीएचडी की फीस में वृद्धि वापस लेने और नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने की मांग दोहराई। साथ ही आरोप लगाया कि गांधी मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों और युवाओं के साथ पुलिस ने बर्बरता की और कई लोगों को बिना सूचना के हिरासत में रखा गया। उन्होंने कहा कि जुल्म की राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक आंदोलन से दिया जाएगा।