प्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, घटना बेहद गंभीर और शर्मनाक है
Awaz E Bihar••14 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
पटना: बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने जमुई की घटना को बेहद गंभीर और शर्मनाक बताया और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर राज्य सरकार की आलोचना की. मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल उठाया, सरकार से जवाब मांगा और अपने पहले के बयान को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस्तीफे की मांग की. तेजस्वी यादव ने कहा कि जमुई में जो घटना हुई उसे किसी भी तरह से छोटी या अलग घटना नहीं माना जा सकता. उनके मुताबिक राज्य में महिलाएं और लड़कियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं. उन्होंने कुछ सरकारी नेताओं के बयानों का भी जिक्र किया, जिनमें ऐसी घटनाओं को 'छिटपुट' या 'छिटपुट' घटनाएं बताया गया था. तेजस्वी ने कहा कि ऐसी घटनाओं की गंभीरता को कम नहीं किया जाना चाहिए. साथ ही जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी ने कहा कि पुलिस के मुताबिक घटना में सात से आठ लोग शामिल थे, इसलिए सभी आरोपियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. मंगलवार को मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने के बाद पुलिस ने कथित मुख्य आरोपी नंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान झड़प हुई और आरोपी घायल हो गया. इससे पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। तेजस्वी यादव ने मदभीर कार्यवाही की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि मुठभेड़ किन परिस्थितियों में हुई और पुलिस कार्रवाई के दौरान क्या प्रक्रिया अपनायी गयी. उनके मुताबिक अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है, लेकिन हर कार्रवाई में जवाबदेही और पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जमुई घटना में शामिल सभी लोगों पर कानून सम्मत कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए. तेजस्वी ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हाल की अन्य घटनाओं का भी जिक्र किया और सरकार से इन मामलों में अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा देने की मांग की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी ने रोहतास के सासाराम मंडल कारा में एक विचाराधीन कैदी की मौत का मामला भी उठाया. उन्होंने मामले की न्यायिक जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की. उनके मुताबिक, कैदी को 13 सितंबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और 15 सितंबर को सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. तेजस्वी ने पुलिस प्रशासन पर तबादलों और पोस्टिंग में अनियमितता का भी आरोप लगाया और कहा कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराध और हिरासत में मौत जैसे मामलों में सरकार को समय पर कार्रवाई करनी चाहिए.