आगामी वर्षों में विश्वविद्यालय पिछड़े और आदिवासी युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए काम करेगा
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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लिया। उन्होंने जनजाति विश्वविद्यालयों से समुदायों के बीच नेतृत्व और नीति निर्धारण के केंद्र के रूप में उभरने और उनकी शिक्षा, रोजगार और समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश पर कई विशेष जिम्मेदारियां हैं। उम्मीद है कि यह संस्थान जनजाति समाज में आत्मविश्वास, नेतृत्व और नीति निर्धारण क्षमताओं को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य के तहत स्थापित किए गए संस्थानों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र के जनजाति समुदायों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, रोजगार और वन अधिकारों के लिए जमीनी स्तर पर काम करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगे के वर्षों में यह विश्वविद्यालय पिछड़े और जनजाति युवाओं के समग्र विकास के साथ-साथ क्षेत्र के समग्र विकास के लिए भी अर्थपूर्ण प्रयास करेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, विशेष रूप से जनजाति विश्वविद्यालयों को ऐसी आधुनिक और नवाचारी प्रणाली स्थापित करनी चाहिए जो जनजाति लोगों के रोजगार में सुधार लाए और वन उत्पाद, हस्तशिल्प, बाजरा, औषधीय पौधों, पर्यावरणीय पर्यटन और स्थानीय व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में परिणामी काम को बढ़ावा दें। राष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह प्रत्येक छात्र के जीवन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह एक उत्सव का दिन है, लेकिन साथ ही यह क्षण छात्रों को अपने भविष्य के बारे में संकल्प लेने के लिए प्रेरित भी करता है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे तेजी से बदलते हुए परिदृश्य में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कौशल के उभरते क्षेत्रों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल पाठ्यक्रम शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने आसपास के वातावरण से सीखकर व्यावहारिक कौशल भी हासिल करने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि छात्रों को अपने समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े हुए समाज और राष्ट्र के भविष्य को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे तेजी से विकसित होते देश में अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हुए आधुनिक विज्ञान के लाभों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के तहत यह विश्वविद्यालय उत्तरी आंध्र प्रदेश के जनजाति समुदायों को सशक्त बनाने के लिए एक 'विज्ञान और प्रौद्योगिकी हब' चला रहा है। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय ने शैक्षिक और जमीनी दोनों स्तरों पर जनजाति कल्याण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, और ऊर्जा संरक्षण जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने इस विश्वास का व्यक्त किया कि यह सभी पहल एक न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। उन्होंने इस विश्वास का व्यक्त किया कि आंध्र प्रदेश का केंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय इस उद्देश्य की प्राप्ति में अपनी अर्थपूर्ण, व्यापक और व्यावहारिक शिक्षण रणनीति के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान केंद्रित करता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जनजाति समुदायों को आधुनिक शिक्षा के लाभकारी पहलुओं से जोड़ने से स्थानीय युवा देश के न्यायपूर्ण विकास में प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम होंगे।