पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक शांति के पक्ष में हैं - भारत-ऑस्ट्रिया : मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि पूरी दुनिया इस समय एक गंभीर और तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रही है, जिसके प्रभाव वैश्विक स्तर पर सभी देशों पर पड़ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे माहौल में समस्याओं का समाधान सैन्य संघर्ष से नहीं, बल्कि वार्ता और शांति के माध्यम से ही संभव है। प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद हाउस में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिस्चियन स्टॉकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया, दोनों ही यूक्रेन और पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिर, टिकाऊ और दीर्घकालिक शांति के समर्थक हैं। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ते हुए वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों की सुधार आवश्यक है और यह कि दोनों देश आतंकवाद के उन्मूलन के लिए साझा संकल्प रखते हैं। प्रधानमंत्री ने चांसलर स्टॉकर के भारत दौरे को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि चार दशकों के बाद ऑस्ट्रिया के किसी चांसलर का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2026 में हस्ताक्षरित भारत-यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते ने यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत की है। मोदी ने कहा कि यह दौरा व्यापार और निवेश को नई गति प्रदान करेगा। भारत की 'गति और पैमाने' और ऑस्ट्रिया की 'विशेषज्ञता' को मिलाकर वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला तैयार की जाएगी। दोनों देश रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत बनाएंगे। आईआईटी दिल्ली और ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्टजेन के बीच हुआ यह समझौता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2023 में हस्ताक्षरित प्रवास और गतिशीलता समझौता नर्सिंग के क्षेत्र में गतिशीलता को बढ़ावा देगा। दोनों देशों के बीच स्टार्टअप और अनुसंधान सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा। उन्होंने भारत-ऑस्ट्रिया वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम शुरू करने की भी घोषणा की। मोदी ने इस बात का उल्लेख किया कि दिल्ली मेट्रो और अटल टनल जैसी परियोजनाओं में ऑस्ट्रिया की सुरंग निर्माण की विशेषज्ञता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा और शहरी विकास के क्षेत्रों में भी ऑस्ट्रिया की कंपनियां भारत के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चांसलर स्टॉकर का भारत दौरा भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगा।