उत्तराखंड में मदरसों पर बड़ी कार्रवाई, देहरादून-हल्द्वानी समेत अब तक 20 संस्थान बंद
Awaz E Bihar••12 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
उत्तराखंड सरकार ने निर्धारित मंजूरी और शैक्षिक मानकों का पालन नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। हिंदी न्यूज पोर्टल 'टीवी9 भारतवर्ष' पर छपी खबर के मुताबिक, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों ने राज्य के देहरादून और हलद्वानी में कई गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को सील कर दिया है. खबरों के मुताबिक अब तक 20 मदरसों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्राग माधोकर धकाते के मुताबिक, देहरादून में 3 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि आजाद कॉलोनी स्थित जमीयत अल-सलाम इस्लामिया मदरसे को प्रशासन ने सील कर दिया है. वहीं, आजाद कॉलोनी (माजरा) स्थित मदरसा दारुल अरकम और मदरसा दारुल उलूम रहीमिया प्रबंधन ने लिखित रूप से मदरसा बंद करने की सूचना दी है. धकाते ने कहा कि राज्य में अब तक 17 मदरसों को सील कर दिया गया है, जबकि 3 अन्य मदरसों के प्रबंधन ने लिखित सूचना देकर मदरसों को बंद करने की पुष्टि की है. इसके साथ ही राज्य में कुल 20 गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया है. उन्होंने आगे बताया कि नैनीताल जिले के हलद्वानी में 2 गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को सील करने की कार्रवाई की गई है. गोजाजली उत्तर में शनि बाजार रोड पर मदरसा जामिया नूरिया बरकते अमीना और बनभोलपुरा, इंदिरा नगर में एक अन्य गैर-अनुमोदित मदरसा को भी सील कर दिया गया है। हलद्वानी नगर मजिस्ट्रेट एबी वाजपेयी ने कहा कि संबंधित मदरसा प्रबंधन को अनुमोदन दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करने पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गयी. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि राज्य में कोई भी शैक्षणिक संस्थान निर्धारित नियमों और मान्यता आवश्यकताओं को पूरा किए बिना संचालित नहीं होना चाहिए। राज्य में लागू की गई नई व्यवस्था के तहत सरकार का लक्ष्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षिक मानकों को सख्ती से लागू करके बच्चों के लिए आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री धामी ने साफ कहा है कि बच्चों के भविष्य या शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी.