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मानसून सत्र के पहले दिन अल्पसंख्यक मुद्दों पर अख्तरुल ईमान का जोरदार विरोध
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मानसून सत्र के पहले दिन अल्पसंख्यक मुद्दों पर अख्तरुल ईमान का जोरदार विरोध

Awaz E Bihar•20 जुलाई 2026 को 07:39 pm बजे•9 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

पटना, 21 जुलाई: (एबीएन) बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार विधानसभा में पार्टी के नेता अख्तरुल ईमान ने अल्पसंख्यकों से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। इस अवसर पर उन्होंने सरकार पर अल्पसंख्यक वर्ग के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सरकार ने तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए तो ये मुद्दे और अधिक गंभीर रूप ले लेंगे।

प्रदर्शन के दौरान अख्तरुल ईमान ने सरकार से मांग की कि राज्य के अनुदानित मदरसों के शिक्षकों की वर्षों से रुकी हुई वेतन का भुगतान बिना देरी के किया जाए। उन्होंने कहा कि हजारों शिक्षक लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और उनके परिवार गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि शिक्षकों को समय पर वेतन का भुगतान न होना न केवल उनके साथ अन्याय है, बल्कि राज्य के शैक्षिक प्रणाली के लिए भी हानिकारक है।

उन्होंने उर्दू भाषा के संबंध में सरकार की नीति पर भी कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि उर्दू को बिहार की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस दर्जे का सम्मान नहीं किया जा रहा है। राज्य के सरकारी डिग्री कॉलेजों में उर्दू विभाग सक्रिय नहीं हैं, कई स्थानों पर उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है, और स्वीकृत सीटों पर नियुक्ति न होने के कारण छात्रों को अपनी मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अख्तरुल ईमान ने मांग की कि बिहार के सभी सरकारी कॉलेजों में उर्दू शिक्षा को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाए, उर्दू के सभी स्वीकृत विभागों और सीटों को बहाल किया जाए, खाली पदों पर तत्काल नियुक्ति की जाए, और जहां उर्दू शिक्षा की व्यवस्था नहीं है, वहां जल्द से जल्द इसकी शुरुआत की जाए।

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों की शैक्षिक प्रगति, भाषा के प्रसार, और रोजगार से संबंधित मुद्दों को नजरअंदाज करना भारतीय संविधान के समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अल्पसंख्यक समुदाय के संविधानिक अधिकारों का संरक्षण करे और उनकी वैध मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे।

अख्तरुल ईमान ने आगे कहा कि अनुदानित मदरसों के शिक्षकों, उर्दू भाषा, और अल्पसंख्यक संस्थानों से संबंधित मुद्दे कोई नए नहीं हैं, बल्कि वर्षों से हल की प्रतीक्षा में हैं। अगर सरकार वास्तव में शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए गंभीर है, तो उसे तत्काल इन मुद्दों के स्थायी समाधान के लिए व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अल्पसंख्यकों के मुद्दों, अनुदानित मदरसों के शिक्षकों की वेतन, और उर्दू भाषा से संबंधित मांगों पर जल्द फैसला नहीं किया, तो सदन के अंदर और बाहर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन को और अधिक विस्तार दिया जाएगा।

मानसून सत्र के पहले दिन हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर बिहार में अल्पसंख्यक शिक्षा, अनुदानित मदरसों, और उर्दू भाषा के मुद्दों को राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना दिया है।

अख्तरुल ईमान ने सरकार से मांग की कि सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों में उर्दू शिक्षकों की बहाली की जाए, और जहां उर्दू शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं है, वहां स्थायी आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल उर्दू भाषा का मुद्दा नहीं है, बल्कि छात्रों के संविधानिक और शैक्षिक अधिकारों का भी मामला है।

उन्होंने अनुदानित मदरसों के शिक्षकों की रुकी हुई वेतन के तत्काल भुगतान की मांग करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे को और अधिक लंबित करने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर हल करे, ताकि शिक्षकों को आर्थिक कठिनाइयों से मुक्ति मिल सके।

अख्तरुल ईमान ने कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग के शैक्षिक मुद्दों को नजरअंदाज करना राज्य के हित में नहीं है।

उन्होंने कहा कि भीड़ के हाथों हत्या (लिंचिंग) जैसी घटनाएं कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं, और ऐसे अपराधों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में भय और आतंक फैलाने वाले तत्वों को हतोत्साहित किया जा सके।

अख्तरुल ईमान ने मांग की कि लिंचिंग के सभी मामलों को विशेष आधार पर फास्ट ट्रैक अदालतों में चलाया जाए, और अपराधियों को जल्द से जल्द कानून के अनुसार सख्त सजा दी जाए। उनका कहना था कि ऐसी घटनाओं पर तत्काल और निर्णायक कार्रवाई ही जनता को कानून पर विश्वास को मजबूत कर सकती है।

उन्होंने सरकार से यह भी अपील की कि लिंचिंग की घटनाओं को रोकने
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