राही मासूम रज़ा ने अपनी लेखनी से साझी भारतीय विरासत को पुनर्जीवित किया: राज्यपाल
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पटना, 18 सितंबर (एबीएन) राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अत्ता हसनैन ने कहा कि राही मासूम रज़ा ने अपने लेखन में भारत की साझी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखा और आम लोगों के जीवन, रिश्तों और अनुभवों को साहित्य में प्रभावी ढंग से चित्रित किया। गुरुवार को डॉ. रजा की जन्मशती के अवसर पर बिहार म्यूजियम, पटना में आयोजित 'पटना सेमिनार' को संबोधित करते हुए श्री हसनैन ने कहा कि राही मासूम रजा कवि, उपन्यासकार और फिल्म संवाद लेखक थे. वह भारत को समझने और समझाने वाले सर्वश्रेष्ठ लेखक भी थे। उनकी बातें किताबों से निकलकर लोगों की जिंदगी और यादों का हिस्सा बन गईं। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. रजा ने भारत को आम लोगों की नजर से देखा और उसे अपने कार्यों में प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं में गांव, घर, परिवार, दोस्ती और रिश्तों की गहरी तस्वीर देखने को मिलती है। 'आधा गांव' में गांगुली सिर्फ कहानी की पृष्ठभूमि नहीं बल्कि कहानी का अहम हिस्सा बन जाते हैं. उन्होंने आम लोगों के रिश्तों और जिंदगी के जरिए बंटवारे के दर्द को भी सामने रखा। श्री हसनैन ने कहा कि राही मासूम रजा की भाषा आम भारतीय भाषा थी, जिसमें हिंदी, उर्दू, भोजपुरी और बोलचाल के शब्दों का सहज मिश्रण था. वे अपनी पहचान के विभिन्न हिस्से अपने साथ ले गए। ग़ालिब और मीर के साथ-साथ कबीर और तुलसी भी उनकी साझी विरासत का हिस्सा थे। वे स्वयं को गर्व से 'गंगापति' कहते थे।