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हदीस की किताबों से मार्गदर्शन प्राप्त कीजिये!

Awaz E Bihar•7 अप्रैल 2026 को 01:35 pm बजे•16 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

डॉ. मुहम्मद वासि ज़फर
हदीस शरीयत इस्लामिया का दूसरा मूल स्रोत है, पहला स्रोत तो कुरआन है, यह हम सब जानते हैं लेकिन कुरआन करीम को हदीस نبवी और आथार सहाबा की रोशनी में ही बेहतर तरीके से समझा जा सकता है क्योंकि रसूल اللाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की यह जिम्मेदारी थी कि वे कुरआन करीम की तफसीर और तशरीह करके लोगों को समझाएं और इसकी تعलीमात पर अमल करके उनके लिए एक पракटिक नमूना भी पेश करें।

अल्लाह तआला का फरमान है: {व अन्जलना इलैक अल्जिक्र लितुबय्यिन लिलन्नास मा नुज्जिल इलैहिम व लअल्लाहुम यतफक्करून} ’’और हमने आपके पास भी यह जिक्र (कुरआन) इस लिए नाजिल किया है ताकि आप लोगों के लिए इसकी वजाहत करदें जो उनकी तरफ नाजिल किया गया है और ताकि वे गौर व फिक्र करें।‘‘ (अल-नहल: ४४)।

इसी तरह अरशद रबानी है: {व मा अन्जलना अलैक अल्किताब इल्ला लितुबय्यिन लहुमुल्लजी اختलफू फिहि व हुदन व रहमतन लिकौम युमिनून} ’’और हमने आपके पास यह किताब صرف इस लिए नाजिल की है ताकि आप उनके लिए इसकी वजाहत करदें जिसमें उन्होंने इख्तलाफ किया है और यह उनके लिए हिदायत और रहमत है जो ईमान लाते हैं।‘‘ (अल-नहल: ६४)।

इसी तरह फरमान रबी है: {या अय्युहार्रसूल बल्लिघ मा उन्जिल इलैक मिर्राब्बिक व इन लम तफअल फमा बल्लघ्त रिसालतह} ’’ए रसूल! जो कुछ भी आपकी तरफ आपके रब की तरफ से नाजिल किया गया है, उसे लोगों तक पहुंचा दीजिए और अगर आप ने ऐसा नहीं किया तो गोया इसकी रिसालत का हक अदा नहीं किया।‘‘ (अल-मायदा: ६७)।

इस तरह रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कुरआन की तशरीह और एबलاغ की यह जिम्मेदारी कमाहका निभाई है। इस पेहलू से देखें तो हदीस, नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उन्ही अकवाल और अफआल और तकरीरात (साइलेंट अप्रूवल) का मجمुआ है जो आपने कुरआन करीम और शरीयत इस्लामिया की कौली और अमली वजाहत के सिलसिले में सादर हुए हैं।

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बरा ए रास्त शागिर्द चूंकि सहाबा कराम रजवान अल्लाह अलैहिम अजमईन थे, इसलिए कुरआन करीम और शरीयत इस्लामिया को समझने में उनके अकवाल और अफआल की भी बड़ी अहमियत है जिन्हें "आथार सहाबा" के नाम से मोसुम किया जाता है।

आज हदीस की जो अक्सर किताबें मौजूद हैं वे दरअसल हदीस रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आथार सहाबा का मجمुआ ही हैं। हदीस की अहम किताबों में मुवत्ता इमाम मालिक, मसंद इमाम अहमद बिन हंबल, सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम, जामी तिरमिजी, सुनन अबी दाऊद, सुनन नसाई, सुनन इब्न माजा, मसद्रक अला सहीहैन लिलहाकिम, सहीह इब्न हिब्बान, सहीह इब्न खुजैमा, सुनन अलकबीरा लिलबैहकी, शعب अलईमान लिलबैहकी, मसनफ इब्न أبي شیبہ, مصابیح السنۃ للبغوی, شرح السنۃ للبغوی, مشکوۃ المصابیح للخطیب التبریزی, کنزالعمال فی سنن اقوال وافعال للامام علی متقی الہندی, بلوغ المرام من أدلۃ الاحکام للحافظ ابن حجر عسقلانی, سلسلہ احادیث صحیحہ للالبانی आदि शामिल हैं।

इनके अलावा सुनन الدارمی, سुनن الدار قطنی, مسند امام شافعی, مسند البزار, امام طبرانی की معجم الکبیر, معجم الاوسط और معجم الصغیر, امام سیوطی کی جمع الجوامع المعروف بالجامع الکبیر اور الجامع الصغیر भी हदीस की मशहूर किताबें हैं।

शरीयत इस्लामिया को समझने और दीनी मुआमलात में खुद कफील होने के लिए यह जरूरी है एक पढ़ा लिखा और तालीम याफ्ता मुसलमान हदीस نبवी और आथार सहाबा का मुताला करे। जब ही हम यह समझ सकते हैं कि सही इस्लामी अकीदा क्या हैं और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जीवन के विभिन्न शعبों में हमारे लिए किन बातों को लाजिम किया है और किन बातों से बचने की हिदायत दी है।

इसी तरह अरकान इस्लाम को समझने और दीनी जीवन जीने के लिए हदीस का मुताला करना बहुत जरूरी है। हदीस की किताबें पढ़ने से हमें पता चलता है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने जीवन में कैसे दीन को अमल में लाया और अपने सहाबा को कैसे दीन की तालीम दी।

हदीस की किताबें पढ़ने से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने सहाबा को कैसे दीन की तालीम दी और उन्हें कैसे दीन के मुआमलात में मदद की।

इसी तरह हदीस की किताबें पढ़ने से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने जीवन में कैसे दीन को अमल में लाया और अपने सहाबा को कैसे दीन की तालीम दी।

हदीस की किताबें पढ़ने से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने सहाबा को कैसे दीन की तालीम दी और उन्हें क
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