इज़राइल को हथियार मुहैया कराना मानवता और हिंदुस्तानियत के दामन पर कलंक: मौलाना महमूद मदनी
Awaz E Bihar••45 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
नई दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने एमनेस्टी इंटरनेशनल की हालिया शोध रिपोर्ट पर गहरी चिंता, गहरा दुख और असंतोष व्यक्त किया है, जिसमें यह खुलासा किया गया है कि 7 अक्टूबर 2023 से नवंबर 2025 के बीच भारत से लाखों की संख्या में सैन्य हथियार और तोप के गोले इज़राइल को भेजे गए हैं। मौलाना मदनी ने इस गंभीर मामले पर विदेश मंत्रालय द्वारा जारी प्रतिक्रिया को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि इतने संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामले पर सरकार का ऐसा रवैया देश की नैतिक आधारों और वैश्विक गरिमा के लिए अत्यधिक हानिकारक है। मीडिया को जारी आधिकारिक बयान में मौलाना मदनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने 2024 में सभी देशों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि कब्जे और नरसंहार की कार्रवाइयों के मद्देनजर इज़राइल को हथियारों की आपूर्ति रोकी जाए। साथ ही 1949 के जिनेवा कन्वेंशन और 1948 के नरसंहार रोकथाम कन्वेंशन के प्रकाश में युद्ध अपराधों में उपयोग किए जाने वाले हथियारों की आपूर्ति पर सख्त प्रतिबंध है। इसके बावजूद यह जानते हुए भी कि इन हथियारों का उपयोग निर्दोष बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों के एकतरफा हत्याकांड में किया जा रहा है, हथियारों की आपूर्ति एक अपराधिक कार्य और नरसंहार में भागीदारी के समान है। यह न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध है, बल्कि मानवता और हिंदुस्तानियत के लिए एक दाग है। मौलाना मदनी ने याद दिलाया कि महात्मा गांधी के समय से ही भारत का स्वर्णिम इतिहास हमेशा पीड़ित फिलिस्तीनियों के साथ खड़े रहने का रहा है। वर्तमान सरकार ने इसे बदलकर तटस्थता का झूठा दावा किया है, लेकिन अगर इसे स्वीकार भी कर लिया जाए तो तटस्थ रहने का दावा करना और दूसरी ओर अत्याचारी को हथियार मुहैया कराना हमारे देश के सिद्धांतों, इसके नैतिक इतिहास और वादे से सबसे बुरी गद्दारी और बेईमानी है जिसे बुद्धिजीवी नागरिक किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, "इस अवसर पर हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह सभी सरकारी और निजी कंपनियों से इज़राइल को होने वाली हथियारों और युद्ध सामग्री की आपूर्ति पर तत्काल और पूर्ण रोक लगाए, अपने अस्पष्ट बयानों को समाप्त करें और सच्चाई को सामने लाए, और मानवता की रक्षा के लिए इज़राइल से अपने सभी सैन्य संबंधों को समाप्त करे। भारत का वैश्विक गरिमा उसकी नैतिक शक्ति और सच्चाई के साथ खड़े होने पर आधारित है। इसलिए इज़राइल से संबंध तोड़कर देश की नैतिक प्रतिष्ठा को बचाया जाए।"